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जहर बनकर लडेगी दवा
On 9/7/2010 11:47:33 AM

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नई दिल्ली। देखने में घिनौना सा दिखने वाला काकरोच यानी तिलचट्टा और टिड्डी के दिमाग के उत्तक यानी टीश्यू मानव शरीर की कोशिकाओं को कोई नुकसान पहुंचाए बगैर 90 प्रतिशत से भी अधिक ड्रग रजिस्टेंट बैक्टीरिया को नष्ट करने की ताकत रखते हैं।

नाटिंघम यूनीवसिर्टी के एक वैज्ञानिक साइमन ली का कहना है कि उन्होंने काकरोच और टिड्डी के मस्तिष्क में मौजूद ऐसे टिश्यू केमालीक्यूल का पता लगाया है, जिससे एक ऐसी दवा बनाई जा सकेगी जो ई कोली और एमआरएसए मेथिसिलिन रेजिस्टेंट स्टैफीलोकोकस यूरस यानी बैक्टीरिया का एक ऐसा स्ट्रोन जो मल्टी ड्रग रजिस्टेंट हो को नष्ट कर सकेगी। इस वैज्ञानिक ने काकरोच और टिड्डी के ब्रेन के टिश्यू में नौ ऐसे मालीक्यूलों का पता लगाया है जो बैक्टीरिया के लिए एक प्रकार से जहर का काम करेंगे और उनका मनुष्य की कोशिकाओं पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पडेगा। उनका कहना है कि इन मालीक्यूल की मदद से मल्टी ड्रग रजिस्टेंट बैकटीरियल इन्फैक्शन का एक नए और कारगर ढंग से उपचार करना संभव हो सकता है।

इन जीवों के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र यानि नर्वस सिस्टम के टिश्यू से 90 प्रतिशत से भी अधिक एमआरएसए और ई कोली बैक्टीरिया को नष्ट किया जा सकेगा जबकि उनका मनुष्य की कोशिकाओं पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा। अनुसंधानकर्ता का मानना है कि इन जीवों के मस्तिष्क में मौजूद प्रोटीन इन बैक्टीरियों को नष्ट करने में मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।

प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि साइमन ली अपनी इस उपलब्धि को इसी सप्ताह नाटिंघम में होने वाले सोसायटी फार जनरल माइक्रोबाइलाजी सम्मेलन में प्रस्तुत करने जा रहे हैं।

परभक्षी तितली के समूह प्रजनन के संबंध में मिली महत्वपूर्ण सफलता

बेंगलूर। बेंगलूर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक मीलीबग कीटों से किसानों को राहत प्रदान करते हुए एक ऐसी परजीवी तितली के बडे पैमाने पर प्रजनन में सफलता प्राप्त की है, जो इन कीट को अपना आहार बनाती है। विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान विभाग के डॉ एमजी वेंकटेश ने बताया कि भारतीय किसान पिछले कई वर्षों से मीलीबग कीटों की छह प्रजातियों से बहुत परेशान थे। ये कीट बडी तेजी से प्रजनन करते ह और मुख्य रूप से काफी, कोको, अंगूर, अमरुद, आम, गन्ना, शहतूत, सब्जी के पौधों को अपना आहार बनाते हैं, जिससे बडे पैमाने पर आर्थिक नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि मीलीबग कीट फूल और फलों की फसलों पर हमले करते हैं। एक मीलीबग कीट अपने 30 दिन के जीवन चक्र में 100 से 500 अंडे देता है। इस कीट से अमेरिका में कम से कम 75 करोड अमेरिकी डॉलर और भारत में करोडों रूपए का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि इन कीटों पर कोई भी कीटनाशक असर नहीं करता, क्योंकि इनके शरीर पर मोम जैसी परत होती है जिससे कीटनाशक उसके शरीर पर नहीं ठहरता।

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