जबलपुर। ऐक्सिस बैंक 50 करोड फर्जीवाडा प्रकरण में हर दिन नई बात सामने आ रही है। जिन ऐक्सिस बैंक कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही की गई है, उन्होंने जनवरी 2010 से 28 मार्च 2010 के बीच कुल जमा राशि में से 3 करोड रुपये की राशि बाजार में सूदखोरी के लिए उतार दी थी।
3 माह में बैंक कर्मचारियों ने करीब 1 करोड रुपये ब्याज के रूप में कमाए। सूत्रों के अनुसार ऐक्सिस बैंक के कर्मचारियों ने शातिर दिमाग और कुछ स्थानीय लोगों के सहयोग से जनवरी से मार्च के बीच 3 माह के अल्प समय में 3 करोड रुपये पर करीब 10 प्रतिशत की दर से खुले बाजार से 1 करोड ब्याज के रूप में कमाये। बैंकिंग इंडस्ट्री की पूरी कार्यप्रणाली से वाकिफ इन कर्मचारियों ने मार्च के अंत में 3 करोड रुपये वापस उसी खाते में डाल दिये, जहां से निकाले गये थे, जो अब जाकर ज्ञात हुआ कि फर्जी था।
लेकिन इस बार नहीं हुए सफल
सूत्रों का कहना है कि अपने काम में सफल होने पर इन कर्मचारियों ने एक बार फिर ऐसे ही खेल को अंजाम देने के लिये सिद्दीकी के नाम से खोले गये खाते में से राशि का निकालना शुरू किया लेकिन इस बार किस्मत ने साथ नहीं दिया और वे धर लिये गये।
सूत्रों की मानें तो अब यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि अब तक जो रकम पकडी गई है वह ब्याज की हो, जबकि मूल रकम अभी भी बाजार में है। वहीं इस बात की भी तफ्तीस की जा रही है कि ऐसे कौन से स्थानीय लोग हैं, जिनके साथ मिलकर इतनी बडी जालसाजी की व्यूहरचना की गई। |