जबलपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत जारी राशि का हिसाब एकत्रित करने में जिला पंचायत को पसीना आ रहा है। मनरेगा के तहत राशि का उपयोग कहां-कहां और कितना हुआ है, जनपद के कुछ अधिकारियों और ठेकेदार के मनमाने रवैए के कारण राशि की फीडिंग नहीं हो पा रही है। जिला पंचायत अंतर्गत आने वाली सात जनपदों में जबलपुर जनपद एमआईसी की फीडिंग में फीसड्डी साबित हुई है, जबकि अन्य जनपदों में कार्य की गति धीमी होने के कारण तय समय पर राशि का हिसाब नहीं हो पा रहा है।
मनरेगा के तहत केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजना एवं कार्यों के बेहतर क्रियान्वयन के लिए 19 करोड रुपए की राशि जारी की गई। सरकार की मंशा के मुताबिक किस कार्य व योजना में कितना पैसा खर्च किया गया है, इसके एक-एक रुपए की जानकारी को एमआईएस यानि मैनेजमेंट इंर्फोमेशन सिस्टम के जरिए ऑन लाइन एन्ट्री करनी थी, ताकि सरकार को यह मालूम हो सके कि किस योजना में कितनी राशि को खर्च किया गया है और जो राशि जिले को दी गई है वह खर्च हुई है या नहीं। योजना के तहत अपै*ल माह से अभी तक 12 करोड 36 लाख रुपए की राशि फीड की जा सकी है, जबकि अन्य राशि का हिसाब करने में जनपदों के अधिकारी व एजेंसियां लगी हुई हैं। एमआईसी फीडिंग में जबलपुर जनपद नकारा ही साबित हुई है। योजना के तहत डेढ करोड रुपए की राशि जारी की गई , लेकिन जनपद द्वारा अपै*ल माह से अभी तक 77 लाख रुपए की ही फीडिंग की जा सकी है। इसके साथ ही कुण्डम, मझौली, पनागर, पाटन, शहपुरा और सिहोरा की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। जिस कंपनियों को एन्ट्री फीडिंग का ठेका दिया गया, वह भी इस कार्य में रुचि नहीं दिखा रही है। फीडिंग न होने से एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था, इसके बाद भी कार्य में गति नहीं आ सकी है। |