जबलपुर । नगर निगम जबलपुर के सेवानिवृत्त कर्मचारी रामशंकर नामदेव को पेंशन की राशि वापस विभाग में लौटाने तथा पेंशन रोक दिए जाने को गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट के जस्टिस संजय यादव की एकलपीठ ने नगर निगम को कडी फटकार लगाते हुए पूछा है कि उसने सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेंशन लौटाने तथा उसकी पेंशन किन कारणों से रोक दी है। हाईकोर्ट ने ननि जबलपुर की कार्यशैली पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ननि को नियमों के तहत कार्य करना चाहिए। जनता तथा कर्मचारियों की जिंदगी में अवरोधक नहीं बनना चाहिए।
यह याचिका व्यथित होकर सेवानिवृत्त ननि कर्मचारी रामशंकर नामदेव द्वारा दायर की गयी थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पीसी चांडक तथा उत्तम माहेश्वरी ने बताया कि याचिकाकर्ता जबलपुर ननि में कार्यरत रहा और 1988 म सेवानिवृत्त हो गया। तदोपरांत उसे प्रतिमाह पेंशन मिलना प्रारभ हो गयी। याचिकाकर्ता ने सेवा नियमों के तहत अतिरिक्त उपादान राशि के भुगतान हेतु जब उपादान भुगतान अधिनियम 1972 के तहत कानूनी कार्यवाही शुरू की तो ननि द्वारा उसे प्रताडित किया जाने लगा। सहायक श्रमायुक्त जबलपुर द्वारा जब याचिकाकर्ता को सेवा शर्तों के तहत दी गई उपादान राशि के अतिरिक्त 23 हजार 684 रुपए के भुगतान के आदेश ननि को दिए गए तो ननि द्वारा याचिकाकर्ता को पेंशन की राशि सात लाख 27 हजार 945 रुपए वापस निगम में जमा करने के आदेश दे दिए तथा उसे मिलने वाली प्रतिमाह की पेंशन पर रोक लगा दी। इसे उन्होंने अनुचित एवं असंवैधानिक बताते हुए न्यायालय से उचित अनुतोष दिए जाने की प्रार्थना की थी।
अपदस्थ सतना महापौर की सुनवाई आज
जबलपुर। सतना के अपदस्थ महापौर पुष्कर सिंग तोमर ने निर्वाचन शून्य किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। श्री तोमर के खिलाफ एक याचिका केपी शर्मा की ओर से सतना के अधीनस्थ न्यायालय में दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि उन्होंने मतदाताओं को प्रलोभन देकर यह चुनाव जीता है। इसके साथ ही चुनाव में कई तरह की अनियमितताएं किए जाने के आरोप उन पर लगाए थे। तोमर की ओर से अधिवक्ता सुजय पॉल ने बताया कि गवाहों के बयानों के आधार पर व नोटिस तामीली का पक्ष जाने बगैर तोमर का निर्वाचन शून्य घोषित कि ए जाने के आदेश जारी कर दिए थे। जिस पर तोमर द्वारा हाईकोर्ट की शरण ली गई है। जस्टिस यूसी माहेश्वरी की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई सात सितम्बर के लिए नियत की है। |