|
राजधानी परियोजना का काम शहर का विकास करना है , या फिर झुग्गियों को हटाने का। अब तक के उसके क्रिया-कलापों को देखते हुए इस तरह की चर्चा होना लाजिमी है। मास्टर प्लान-05 के तहत बनने वाली कुछ सडकों पर नजर दौडाई जाए तो ऐसा लगता है कि सीपीए ने झुग्गियां हटाने के अलावा और कोई काम नहीं किया। बावडिया कला जैसे कुछ क्षेत्रों के लोग अब यह कहने से नहीं चूक रहे हैं कि किसी को लाभ पहुंचाने के लिए झग्गियां हटाने की सुपारी ली गई थी।
भोपाल। राजधानी परियोजना प्रशासन अपना कार्यक्षेत्र भले ही प्रदेश भर में फैला रहा है , लेकिन राजधानी में उसकी कार्यप्रणाली संतोषजनक नहीं है। शासन द्वारा जिन कार्यों की जिम्मेदारी उसे सौंपी जाती है, उसमें प्रश्नचिन्ह लगते रहे हैं। वह चाहे निर्माण कार्य में विलंब हो या फिर गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्य। कार्य के मिलते ही वह उसकी शुरुआत बडी तेजी से करता है, लेकिन जैसे ही कार्य बीस से तीस प्रतिशत तक पहुंच जाता है, सीपीए की भी स्पीड कम हो जाती है। इसके कई उदाहरण देखने को मिल रहे हैं।
केस -1
दानापानी से बाबडिया तक मास्टर प्लान की सडक बनाने के लिए सडक के किनारे बसी ढाई सौ झुग्गियों को आठ माह पूर्व हटाया गया था , लेकिन निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हुआ।
केस -2
हबीबगंज नाका से साकेत नगर तक बनने वाली रोड में बाधा बन रही झुग्गियों को आठ माह पूर्व हटा दिया गया था , लेकिन निर्माण कार्य दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है।
केस -3
हबीबगंज अंडर ब्रिज से बाबडिया कला होते हुए मिसरोद तक रोड बनना है। इस मार्ग की कुछ झुग्गियां हटाई गई थीं , लेकिन निर्माण कार्य अधूरा है। |