| | दबाया 20 लाख का घपला | | | |
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भोपाल। कलेक्टर भोपाल से 17 मई, 2010 को श्यामपुर निवासी एक व्यक्ति अशोक सैनी ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के अधीन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गांधीनगर, भोपाल में पदस्थ खण्ड विस्तार अधिकारी (बीईई) तारा पटेल एवं अन्य दो कर्मचारियों के खिलाफ क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं से अवैध रूप से पैसा वसूलने की शिकायत की थी।
गांव में साफ -सफाई और अन्य कार्य के लिए दिए गए 10 हजार की राशि में से प्रत्येक आशा कार्यकर्ता से तीन-तीन हजार रुपए कमीशन के रूप में तारा पटेल वसूल कर रही थीं। अन्य शासकीय कार्यों में भी करीब 20 लाख रुपए का घोटाला सामने आया था। उनके साथ एक एकाउंटेंट सुखवीर सिंह और एनएन लीला विनायक का भी नाम लिया गया है। कलेक्टर ने इसको सीएमएचओ कार्यालय में कार्रवाई के लिए भेज दिया। मामले की जांच करने के लिए सीएमएचओ डॉ. पंकज शुक्ला ने जिला मलेरिया अधिकारी एवं एनआरएचएम नोडल अधिकारी डॉ. पद्माकर त्रिपाठी को नियुक्त किया। डॉ. त्रिपाठी न जब मामले की बिंदुवार जांच की तो इसमें एक बडा घोटाला उजागर हुआ। उन्होंने सीएमएचओ को इस मामले को सीआईडी को देने की अनुशंसा कर दी, लेकिन इससे पहले इस गोरखधंधे में लिप्त बीईई तारा पटेल, लेखापाल रामनारायण नाभिक एव एएनएम लीला बनाईत को निलंबित किया जाए, ताकि गांधीनगर क्षेत्र से संबद्ध 127 आशा कार्यकर्ता स्वतंत्र होकर इस भ*ष्टाचार का खुलासा कर सकें।
न किया तबादला और न ही निलंबन की कार्रवाई
हैरत की बात तो यह है कि इस मामले पर संचालनालय में बैठे जिम्मेदार अधिकारिय ने लीपापोती कर सीएमएचओ और जांच अधिकारी की टीप को नजरअंदाज करते हुए आरोपी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करना भी उचित नहीं समझा। इनके विरुद्ध निलम्बन की कार्रवाई भी नहीं की गई , बल्कि बीईई तारा पटेल का बैतूल ट्रांसफर भी निरस्त कर दिया। इस क्षत्र की आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि तारा पटल और उनके इस भ*ष्टाचार म सहयगी कर्मचारियों का काम ही शासन के पैसे में गोलमाल कर हम आशाओं से वसूली करने का है। यदि हम इसका विरोध करते हैं तो हमें हटाने की धमकी दी जाती है। |
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