| | कालाबाजारियों को संरक्षण | | | |
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भोपाल। आपको यह जानकर हैरत होगी कि यह केस तो सिर्फ बानगी है , ऐसे कई मामले हैं जिनमें निलंबन की कार्रवाई महीनों तक लटकी रहती है और कालाबाजारी करने वाले लगातार अपने काम को अंजाम देते रहते हैं। इसके विपरीत घरेलू गैस सिलेण्डर की कालाबाजारी करने वालों पर तत्काल कार्रवाई करते हुए एफआईआर तक दर्ज करवा दी जाती है। वहीं इन दुकानों का महीनों तक निलंबन न होना विभाग की कार्रवाई पर प्रश्नचिह्न खडा करता है।
महीनों नहीं होती कार्रवाई
जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक अनियमितता पकडाए जाने के बाद भी ढुलमुल रवैया अपनाते हैं। प्रकरण तैयार होने के बाद भी दुकान का निलंबन महीनों तक अटका रहता है। तब तक यह दुकान उसी व्यक्ति के पास रहती है , जिसके द्वारा कालाबाजारी की गई है। जबकि पूर्व में निलंबन की कार्रवाई 7 से 10 दिन के भीतर हो जाया करती थी।
मनमर्जी से होती हैं दुकानें अटैच
भो .-139 नंबर दुकान को 133 नंबर पर अटैच करने का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन दुकान 131 नंबर पर अटैच की गई। यही स्थिति दुकान क्रमांक 149 और 150 के लिए बनी। इस तरह मनमर्जी से दुकान अटैच करने का परिणाम यह है कि वर्तमान में इन दुकानों को वहीं लोग संचालित कर रहे हैं, जो कालाबाजारी में लिप्त थे।
विभाग दे रहा संरक्षण
सूत्रों की मानें तो कुछ दुकानों पर विभाग विशेष कृपा कर रहा है। विभाग महीनों तक केस को पेंडिंग रखकर राशन दुकानदारों को संरक्षण देता है , वहीं 165 नंबर दुकान ऐसी भी है, जो पांच से 7 दिन के भीतर ही सस्पेंड हो गई थी। कुछ माह पहले की ही बात करें तो एक राशन दुकान ऐसी भी है, जिसमें भारी अनियमितताएं पाए जाने पर उसका निलंबन किया गया तथा एक माह के भीतर बहाल भी कर दिया गया, जबकि बहाली की प्रक्रिया में तीन माह तक का समय लगता है। जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक एचएस परमार ने बताया कि इन प्रकरणों के बारे में मुझे अभी जानकारी नहीं हैं, आने के बाद कागज देखकर की कुछ बता पाउंगा। |
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