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बेंगलूर । शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाने के अपने प्रयासों के तहत मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने अब कडा रुख अपनाते हुए निजी स्कूलों को दो टूक शब्दों में कहा है कि या तो गरीब बच्चों को मुफ्त में पढाओ या फिर स्कूल को ताला लगाने के लिए तैयार रहो।
केंद्रीय मंत्री सिब्बल ने कहा कि सरकार तमाम विवादों के बाद भी शिक्षा का अधिकार कानून को पूरी तरह लागू करेगी। उन्होंने कहा कि देश भर के निजी स्कूलों में समग्र शिक्ष के तहत 25 फीसदी गरीब बच्चों के दाखिले वाले नियम का पालन नहीं करने वाले स्कूलों को बंद कर दिया जाएगा।
शिक्षा वित्त निगम की स्थापना का वादा - सिब्बल ने कहा कि देश में बुनियादी ढांचों के विकास को अधिक प्राथमिकता दी जाती है और अगर उच्च पथ निर्माण की बात आती है, तो निवेशकों को सस्ती दर पर उधार मिल जाता है, लेकिन हमारा मानना है कि शिक्षा बुनियादी ढांचों के विकास से ज्यादा जरूरी है। इसके लिए सरकार शिक्षा वित्त निगम (एजुकेशन फायनांस कॉरपोरेशन) के गठन के बारे में विचार कर रही है।
इसके तहत दो अवधारणाएं हैं, जिन पर चर्चाएं चल रही हैं। पहला छात्रों को पढाई के लिए कर्ज सुविधा प्रदान करना, जिसमें कर्ज की गारंटी केंद्र सरकार देगी। दूसरा शिक्षा के क्षेत्र में निवेश करने वालों को विशेष छूट के तहत कर्ज प्रदान करना। इसमें निवेशकों को कर्ज चुकाने के लिए 20-25 वर्षों की समय-सीमा दी जाएगी। जबकि निगम की स्थापना के लिए बजटीय सहयोग की जरूरत है। जब नीति निर्धारण हो जाएगा तब वित्त मंत्री से इसके लिए सहायता मांगी जाएगी। फिलहाल इसके लिए योजना आयोग के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अधिक स्वायत्तता देने की जरूरत है और इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की अधिक है। |