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भोपाल। राजधानी में मंगलवार को स्वाइन फ्लू के 5 मरीजों के सैम्पल जबलपुर लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं, वहीं 8 मरीजों की रिपोर्ट पॉजीटिव आई है। पॉजीटिव मरीजों की तेजी से बढ रही संख्या और लगातार हो रहीं मौतों से भोपाल में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। इस समय भोपाल म ही सबसे अधिक 60 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं।
इधर , स्वाइन फ्लू के बढते मरीजों के उपचार के लिए गांधी मेडिकल कॉलज में फ्लू की जांच के उपकरण अभी तक नहीं खरीदे जा सके हैं, जबकि इन चिकित्सा उपकरणों को क्रय करने के लिए एक माह पहले शासन स्तर पर मंजूरी दी जा चुकी है। हमीदिया अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में फिलहाल मेडिसिन विभाग से एक वेंटीलेटर लगवा दिया गया है। लेकिन अन्य उपकरण की कमी अभी भी बरकरार है।
टीके पड गए कम
स्वाइन फ्लू का उपचार करने वाले चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ के लिए केन्द्र से स्वाइन फ्लू के टीके बुलवाए गए थे। यह टीके हमीदिया , जेपी, काटजू अस्पताल के चिकित्सकों को तो लग गए हैं, लेकिन गैस राहत अस्पतालों के एक भी चिकित्सक और अस्पताल कर्मचारी को यह टीके नहीं लग पाए हैं। सीएमओ गैस राहत डॉ. आरएस वर्मा ने इन टीकों की मांग की है।
बीमारियों के मरीज दहशत में
स्वाइन फ्लू से हो रहीं मौतों में भोपाल सबसे आगे निकल गया है। इससे हमीदिया , जेपी, कमला नेहरू में भर्ती मरीजों में दहशत है। इन मरीजों के परिजन इस बात से घबराए हुए हैं कि स्वाइन फ्लू का वायरस किडनी, लीवर, टीबी, निमोनिया जैसी बीमारियों के मरीजों को सबसे ज्यादा संक्रमित करता है। अब तक 15 मृतकों में 10 मरीजों की मौत स्वाइन फ्लू के साथ दूसरी बीमारी की वजह भी है।
तीन विभागों की लापरवाही पड रही मरीजों पर भारी
भोपाल। राजधानी में हर चौथा व्यक्ति किसी न किसी बीमारी से गंभीर रूप से पीडित है। सही मायने में शहर बीमारियों का गढ बनता जा रहा है। शहर को साफ स्वच्छ रखने , बीमारी मुक्त करने की जिम्मेदारी जिन तीन विभागों स्वास्थ्य, मलेरिया एवं नगर निगम पर है उसके आला अधिकारी न केवल बेखबर हैं, बल्कि इन विभागों के अधिकारी एयर कंडीशनर चम्बर में बैठकर मानीटरिंग कर रहे हैं। इस क्षेत्र में काम करने वाले स्वयंसेवी संस्थाएं भी चुप हैं। हालांकि, कुछ संगठनों ने दवा छिडकाव का काम शुरू किया है।
नहीं बैठ रहा तालमेल
शहर में जब बारिश की शुरुआत भी नहीं हुई थी। तब ही यदि शहर की गंदगी को नगर निगम द्वारा बाहर निकलवा दिया गया होता तो यह स्थिति नहीं बनती , आज शहर मलेरिया, डेंगू और स्वाइन फ्लू की जबरदस्त चपेट में है। इसके लिए तीनों विभाग जिम्मेदार हैं, क्योंकि उनमें तालमेल नहीं बैठ रहा है।
मलरिया विभाग को नहीं मिल रहा अमला
मलरिया विभाग की जिम्मेदारी है कि वह शहर को मच्छर मुक्त रखे , लेकिन बार-बार अमले की कमी हने के बावजूद मलेरिया विभाग क फील्ड वर्कर उपलब्ध नहीं कराए गए। यही बहाना उसको मजबूत बनाए हुए है। स्थिति यह है कि 22 लाख की आबादी वाले शहर में मात्र 40- 50 कर्मचारी मलेरिया उन्मूलन में लगाए गए हैं, जबकि जरूरत कम से कम 400 कर्मचारी की है।
स्वास्थ्य अधिकारी एसी में बैठकर रहे मानीटरिंग
संचालनालय में बैठे जिम्मेदार अधिकारी एसी में बैठ कर शहर की साफ सफाई और बीमारियों की मानीटरिंग करने में लगे हैं। जबकि इन्हें यह जानकारी ही नहीं है कि शहर के किस क्षेत्र में बीमारियों , उपचार की क्या स्थिति है। विभाग के पास यह भी आकडा नहीं है कि किन क्षेत्रों से किस किस तरह के रोग फैल रहे ह।
बनते जा रह शहर में कचरे के ढर
शहर में ऐसी एक भी जगह नहीं है जहां कचरे , गंदगी और रुके पडे नाले न हो हर जगह गंदगी पसरी पडी है। हर वार्ड में कई जगह कचरे के ढेर बन गए हैं जिन्हें उठाने वाला कोई नहीं है। यही गंदगी मच्छरों की तादाद बडा रही ह। कहने के तो नगर निगम द्वारा प्रत्येक वार्ड में स्वास्थ्य अधिकारी नियुक्त किए है लेकिन वे करते क्या ह इसकी खोज खबर लेने की फुर्सत निगम के अधिकारियों के पास नहीं है।
अस्पतालों में मरीज मांग रहे इलाज
बढते मच्छरों गंदगी से फैले संक्रमण की वजह से अस्पतालों में मरीजों की भीड इतनी ज्यादा हो गई है कि चिकित्सकों के चैम्बरों के आगे हर दिन लम्बी लम्बी कतारों लगी रहती हं।
कहां गईर्ं फॉगिंग मशीनें
शहर में इस समय नगर निगम की दो फागिंग मशीनें चल रहीं हैं जो केवल वीआईपी क्षेत्र में ही धुंआ छोडत देखी जा सकती हैं। जबकि स्लम एरिये में इनकी सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।
स्टाफ की कमी से गडबडा रही जांच एवं रिपोर्ट
राजधानी में फैली महामारी के बाद भी स्वास्थ्य विभाग हरकत में नहीं आया है। सरकारी अस्पतालों में लैब तकनीशियन नहीं हैं। जबकि जांचों की संख्या चौगनी हो गई है। इससे जांच और रिपोर्ट दोनों गडबडा गई हैं।
क्यों नहीं मिल रहा लोगों केे साफ पानी
नगर निगम की लापरवाही यह है कि राजधानी में लोगों को साफ पानी तक पीने को नसीब नहीं हो रहा है। पीने के पानी को साफ करने के लिए नगर निगम के पास क्लोरीन की गोलियां और ब्लीचिंग पाउडर कई वर्ष से नहीं डाला गया। समाज कल्याण समिति ने दवाईयों का छिडकाव शुरू किया है। समिति सचिव सीमा पंवार के अनुसार अलग -अलग क्षेत्रों में समिति यह कार्य करती रहेगी।
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