नई दिल्ली । चीन ने दक्षिण एशिया में अपना वर्चस्व बढाने को पूरी तरह जायज ठहराया है। उसका कहना है कि वह एशिया का ‘अहम सदस्य’ है और एशिया में शांति व स्थिरता कायम रखना उसकी जिम्मेदारी है।
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जियांग यू ने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस बयान को हल्के में लिया कि बीजिंग दक्षिण एशिया में वर्चस्व हासिल करने के लिए काम कर रहा है। ड्रैगन की करतूतहाल के दिनों में चीन की ऐसी कई गतिविधियों का खुलासा हुआ है, जो भारत के लिहाज से सही नहीं मानी जा सकतीं और भारत-चीन तनाव को हवा दे सकती हैं। चीन ने पहली बार म्यांमार में अपने दो जंगी पोत तैनात किए हैं। गुलाम कश्मीर में वह करीब डेढ दर्जन परियोजनाओं पर काम कर रहा है। अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक उसने गुलाम कश्मीर के गिलगिट और बालटिस्तान में अपने 11000 सैनिक तैनात कर रखे हैं। कश्मीर को विवादित क्षेत्र बता कर उसने भारतीय सेना के वरिष्ठतम अफसरों में से एक को वीजा देने से मना कर दिया। साथ ही, यह भी कहा कि कश्मीर के लोगों को वज अलग पन्ने पर वीजा देने की नीति जारी रखेगा।
प्रशांत महासागर में 20000 किमी के दायरे में युद्धपोत को मार गिराने की क्षमता वाली मिसाइल तैयार करने संबंधी उसकी योजना भी जगजाहिर हो गई है। और तो और, नेपाल में माओवादियों को सांसदों की खरीद-फरोख्त के लिए पैसे देकर मनमाफिक सरकार बनवाने की उसकी चाल भी सामने आ चुकी है। नेपाल सरकार ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं। वैसे, चीन की ऐसी कोशिशों की खबरों के बीच मंगलवार को सातवें दौर के चुनाव में भी प्रधानमंत्री पद के चुनाव में नेपाल में माओवादियों को हार ही हाथ लगी। मनमोहन की बात खारिजइन भारत विरोधी गतिविधियों की खबरों के मद्देनजर सोमवार को भारतीय संपादकों ने मनमोहन सिंह से चीन से संबंधित एक सवाल पूछा था। इसी के जवाब में उन्होंने कहा था कि चीन किसी न किसी तरह दक्षिण एशिया में प्रभुत्व बनाना चाहता है, जिस बारे में भारत को सतर्क रहने की जरूरत है। मंगलवार को बीजिंग में नियमित प्रेस ब्रीफिंग में पत्रकारों ने यू से मनमोहन के बयान पर चीन की प्रतिक्रिया पूछी थी। यू ने कहा कि चीन, दक्षिण एशिया में प्रभुत्व बनाने के लिए काम नहीं कर रहा, बल्कि भारत के साथ मिल कर शांतिपूर्ण तरीके से दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और विकास लाना चाहता है। पर उसकी हरकतें ऐसी नहीं हैं, जिनसे शांति आ सके। अमेरिका से अच्छे संबंधों की वकालतयू ने अमेरिका से हर स्तर पर अच्छे संबंधों की भी वकालत की और इसे अहम बताया। इन दिनों ओबामा प्रशासन के दो वरिष्ठ अफसर चीन की यात्रा पर हैं। यू ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रीय आर्थिक सलाहकार और सहायक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की 5-8 सितंबर की यात्रा का चीन-अमेरिका संबंधों में सकारात्मक असर पडेगा।
विदेश यात्रा पर जाएंगे पीएम
पूर्वी देशों के साथ आर्थिक रिश्ते मजबूत करने की नीति को नया आयाम देने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अगले महीने तीन देशों, वियतनाम, जापान और मलेशिया की यात्रा पर जाएंगे। इन देशों के साथ प्रधानमंत्री विभिन्न क्षेत्रों में एकीकरण और सहयोग पर जोर देगें।
भारत के रक्षा तंत्र में जासूसों की घुसपैठ!
नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की खुफिया एजेंसियों ने जासूसों के जरिये भारत के रक्षा से जुडे प्रतिष्ठानों में सेंध लगा दी है। दुश्मन देशों की खुफिया एजेंसियां भारत के रक्षा प्रतिष्ठानों से डेटा और सूचनाओं को पेन ड्राइव, रिमूवेबल हार्ड डिस्क, सीडी, वीसीडी के जरिए चुरा रही हैं। साफ है कि चीन और पाकिस्तान जैसे देशों ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों की अहम सूचनाओं को हासिल करने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव किया है। इससे पहले ऐसी खुफिया एजेंसियां हैकिंग का सहारा लेती थीं, लेकिन भारत द्वारा उठाए गए जरूरी कदमों के चलते हैकिंग के जरिए *यादा जानकारी हासिल नहीं हो पा रही थी। |