ग्वालियर। एडीबी के तहत पिछले पांच वर्ष में हुए कार्यों में बरती गई अनियमितताओं की जांच का मामला परिषद की फाइलों में दब गया है। लगभग 6 माह पूर्व परिषद की बैठक में सत्ता और विपक्ष ने सर्वसम्मति से जांच के लिए मुहर लगाई थी। इसके लिए समिति गठित होती उससे पहले ही नगर निगम आयुक्त का तबादला हो गया और वर्तमान निगमायुक्त ने जांच की फाइल पुनर्विचार के लिए परिषद को वापस कर दी। इसके बाद निगमायुक्त चार एजेंडा बना चुके हैं, पर जांच को एजेंडे में शामिल नहीं किया। इसका फायदा अधिकारी उठा रहे हैं और नए घोटालों की तैयारी में जुट गए हैं।
पुनर्विचार के लिए भेजी वापस
तत्कालीन निगमायुक्त डॉ. पवन शर्मा का उसी दौरान तबादला हो गया और नरेन्द्र बहादुर सिंह राजपूत ने नए नगर निगम आयुक्त के रूप में कमान संभाली। उन्होंने सबसे पहले यही काम किया कि जांच की फाइल परिषद को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दी। नियम अनुसार अगर परिषद में कोई निर्णय 30 दिन के अंदर नहीं हो पाता है तो निगमायुक्त को इस अवधि में विशेष मीटिंग बुलाने का अधिकार होता है। यहां ऐसा नहीं किया गया। परिषद में वापस आई फाइल को छह माह होने को है, पर यह मामला अब एजेंडे में शुमार नहीं हो पा रहा है।
क्या है मामला
एशियन विकास विकास ने शहर के विकास के लिए योजना बनाई, जिसके लिए उसने नगर निगम को 110 करोड रुपए की भारी-भरकम रकम ऋण के तौर पर विभाग को दी। इस राशि को खर्च करने के लिए प्रोजेक्ट उदय के तहत एक दर्जन कार्यों का मसौदा तैयार किया गया। यहां सबसे हैरानी की बात यह रही कि इतनी बडी परियोजना को पीएचई के दो उपयंत्रियों के हवाले कर दिया । प्रोजेक्ट उदय का वर्तमान हाल किसी से छुपा नहीं है। नई परिषद के गठन पर समीक्षा गुप्ता महापौर बनीं। जनवरी 2010 में हुई परिषद की बैठक में सर्वसम्मिति से यह निर्णय लिया गया कि एडीबी के तहत पिछले पांच वर्ष में जो भी कार्य हुए हैं और उनमें बरती गईर्ं अनियमितताओं की पूरी जांच लोकायुक्त से कराई जानी चाहिए। निर्णय पर तत्कालीन निगमायुक्त और एडीबी से जुडे अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए और जांच लंबित रखने पैंतरेबाजी शुरू कर दी गई।
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