ग्वालियर। वन अपराधों और अवैध उत्खनन को रोकने के लिए विभाग किराए के वाहनों से जंगल में गश्त करेगा। इसके पीछे अधिकारियों का तर्क है कि विभाग के वाहनों को अपराधी पहचानते ह। जब भी इन वाहनों से गश्त पर जाते हैं तो वे भाग जाते हैं या पथराव करने लगते हैं। इस संबंध में वन संरक्षक ने मुख्य वन संरक्षक से दो वाहनों की अनुमति चाही है।
वन क्षेत्र में हो रहे अवैध उत्खनन को रोकने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा ह, इसके बावजूद इस पर रोक लगाने में कामयाबी नहीं मिल सकी। सूत्र बताते हैं कि इसके पीछे एक कारण तो ये है कि विभाग के ही कुछ अधिकारी और कर्मचारी पत्थर माफियाओं को परोक्ष रूप से संरक्षण देते है, दूसरे जब भी वरिष्ठ अधिकारी गश्त पर या मुखबिर की सूचना पर जंगल में जाते हैं तो इस कारोबार से जुडे लोग उनके वाहन को देखकर भाग जाते हैं अथवा उनके यहां काम करने वाले आदिवासी पथराव करना शुरु कर देते हैं।
इस तरह की घटनाओं में कई बार वनकर्मी घायल भी हो चुके हैं। 3 सितंबर को वन संरक्षक श्रीमती बिंदु शर्मा अपने अमले के साथ मुखबिर की सूचना पर घाटीगांव क्षेत्र के लोधूपुरा के निकट कुआ खोरा से अवैध रूप से पत्थर ले जा रहे ट्रैक्टर को पकडने पहुंची तो एक दर्जन से अधिक लोगों ने उन पर पत्थर बरसाने शुरु कर दिए।
इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए वन संरक्षक ने किराए के वाहनों से गश्त करने का निर्णय लिया है। इसके लिए दो वाहन किराए पर लिए जाएंगे। इससे पत्थर माफियाओं को चकमा देकर पकडने के प्रयास करने की योजना है। गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व इसी तरह के हमलों में कुछ वनकर्मी घायल भी हो चुके हैं। वन संरक्षक के इस प्रयास पर विभागीय लोगों का कहना है कि जब घर के लोग ही अपराधियों को संरक्षण देते हैं तो वन अपराधों पर लगाम कैसे लगाई जा सकती है। देखना ये है कि वन संरक्षक का यह प्रयोग कितना सफल होता है। |