ग्वालियर। बावन पायगा क्षेत्र में रहने वाले हरीप्रकाश सक्सेना का पुस्तैनी भवन बना हुआ है। इस भवन में उनके भाइयों का भी हिस्सा था। चूंकि मकान बंटवारा नहीं हुआ था, इसलिए मकान को विक्रय नहीं किया जा सकता। वर्ष 2009 में हरीप्रकाश सक्सेना के भाइयों ने इस मकान को बेच दिया। हद तो यह है कि जब सक्सेना ने सभी तथ्य प्रस्तुत करते हुए मकान की रजिस्ट्री निरस्त करने की मांग रजिस्ट्रार से की, तो उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। हालांकि मकान विक्रय करने से पूर्व खरीददार के वकील द्वारा आम सूचना प्रकाशित कर दावे आपत्ति मांगी गई थी, लेकिन इस आम सूचना से पीडित पक्षकार अनजान था।
स्टाम्प ड्यूटी की चोरी!ः मकान की रजिस्ट्री लगभग 4 लाख 50 हजार रुपए में की गई है, जबकि मकान की वास्तविक कीमत तत्कालीन समय छह लाख रुपए से ज्यादा थी। वर्तमान में इस मकान को दो हिस्सों में बेच दिया गया है और इसके एवज में मकान विक्रेता को 10 लाख रुपए मिले हैं।
उप पंजीयक की मिली भगतः पीडित पक्षकार के अनुसार मकान की रजिस्ट्री सहायक पंजीयक डीडी रामपुरे द्वारा की गई है और उनकी सहायता से ही इस मकान को बिना बंटवारे बेचा गया है। इस मामले को लेकर पिछले एक वर्ष में सक्सेना 100 से ज्यादा चक्कर रजिस्ट्रार कार्यालय के लगा चुके हैं, लेकिन उप पंजीयक डीडी रामपुरे एवं रजिस्ट्रार उनकी बात सुनने को तैयार ही नहीं हैं।
सूचना के अधिकार का सचः पीडित द्वारा सूचना के अधिकार का उपयोग कर 8 जुलाई 09 को रजिस्ट्रार कार्यालय से सम्बंधित रजिस्ट्री के बारे में जानकारी मांगी गई थी। लेकिन 22 जुलाई 09 को रजिस्ट्रार कार्यालय से भेजे गए पत्र में पंजीयन अधिनियम की धारा 57 (3)का उल्लेख करते हुए संबंधित पक्षकार को ही रजिस्ट्री की जानकारी प्रदान करने की बात कहकर जानकारी देने से मना कर दिया गया।
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