| | हर 3 में से एक भारतीय भ्रष्ट | | | |
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नई दिल्ली । भ्रष्टाचार को लेकर आम आदमी की सोच से केंद्रीय सतर्कता आयोग भी सहमति रखता है। बकौल आयोग हर तीन में से एक भारतीय भ्रष्टाचार में लिप्त है। इसी हफ्ते रिटायर होने वाले केंद्रीय सर्तकता आयुक्त (सीवीसी) प्रत्युष सिन्हा ने माना है कि उनके कार्यकाल का सबसे खराब पहलू यह निरीक्षण करना रहा है कि सुविधाओं के बढने के साथ भ्रष्टाचार में कैसे बढोतरी हो रही है। सिन्हा के अनुसार जब वे छोटे थे और उन दिनों अगर कोई आदमी भ्रष्ट पाया जाता था तो इसे सामाजिक कलंक माना जाता था। लेकिन समाज ने भ्रष्टाचार की बीमारी को सामाजिक स्वीकार्यता दे दी है।
महज 20 फीसदी ईमानदार
सिन्हा के अनुसार बमुश्किल 20 प्रतिशत लोग ही ऐसे होंगे जो अपनी अंतरात्मा की शक्ति के बल पर ईमानदारी से जिंदगी जी रहे हैं। आधुनिक भारत में धनवान को ही सम्मानजनक माना जाता है। लेकिन कोई यह प्रश्न नहीं उठाता कि उसने इतना धन कैसे कमाया है। |
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