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लखनऊ । करीब 18 साल पहले अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ आगामी 24 सितंबर को फैसला सुनाएगी। बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद देश भर में सांप्रदायिक हिंसा भडक उठी थी, जिसमें 2000 से अधिक लोगों की जान गई थी। इस मामले में भाजपा, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कई बडे नेताओं पर मुकदमा चल रहा है। पिछले महीने इस मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने 23 लोगों के खिलाफआरोप लगाए थे। इसमें तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट आरएन श्रीवास्तव, विहिप और भाजपा के कुछ पदाधिकारी शामिल हैं।राज्य सरकार ने कानून व्यवस्था को लेकर कमर कसनी शुरू कर दी है।
निषेधाज्ञा लागू
अयोध्या शहर में पिछले दिनों से ही निषेधाज्ञा लागू कर दी है। राज्य के प्रमुख संवेदनशील शहरों में सुरक्षा के इंतजाम कर दिये गए हैं। राज्य सरकार ने केंद्र से अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की भी मांग की है।
सीबीआई की चार्जशीट
इसके पहले सीबीआई 49 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें पूर्व गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और विहिप के नेता अशोक सिंघल शामिल हैं। हालांकि अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश पर तकनीकी आधार पर 21 लोगों को इस मामले से बरी कर दिया है। जिन लोगों को तकनीकी आधार पर बरी किया है, उनमें भाजपा नेता आडवाणी, विहिप नेता अशोक सिंघल, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे शामिल हैं। हालांकि आडवाणी और सात अन्य लोग रायबरेली की विशेष अदालत में भडकाऊ और सांप्रदायिक भाषण देने के आरोपों का सामना कर रहे हैं, लेकिन न्याय व्यवस्था की जटिलताओं का लाभ कल्याण सिंह और बाल ठाकरे को मिला और उन्हें किसी आपराधिक मामले का सामना नहीं करना पड रहा है। |