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नई दिल्ली। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों में बडी संख्या में शिक्षकों के गैर हाजिर रहने और बच्चों के पढाई बीच में ही छोडने पर कांग्रेस अध्यक्ष ने गंभीर चिंता व्यक्त की। देश के विभिन्न क्षेत्रों में 31 नवोदय विद्यालयों का शुभारंभ करते हुए राष्ट्रीय सलाकार परिषद की अध्यक्ष ने यहां एक समारोह में कहा कि हमें यह सोचना चाहिए कि देश में बडी संख्या म सरकारी स्कूलों में नवोदय विद्यालय के स्तर की शिक्षा क्यों नहीं दी जा रही है। गांव के स्कूलों में एक चौथाई शिक्षक खुद ही गैर हाजिर रहते हैं और स्कूलों में बच्चे दाखिला तो लेते हैं लेकिन बडी संख्या में वे अपनी पढाई बीच में ही छोड देते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संप्रग सरकार बच्चों को छात्रवृति प्रदान कर रही है लेकिन इसके बारे में जरूरतमंद लोगों के बीच जागरूकता और जानकारी फैलाने की जरूरत है।
यहां शुरू होंगे स्कूल
वायनाड , लुंगलेई, लावथेंगलाई, पूर्वी केमांग, पश्चिमी गारो पहाडी, पारेन, भद्रक, धमतारी, कांकेर, कोरिया, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम, गढवा, हूगली, विरभूमि, फतेहाबाद, यमुनानगर, अंबाला, श्रावस्ती, बलरामपुर, गाजियाबाद, मुरादाबाद, औरिया, देहरादून, चंपावत, कारौली, पंचहमल, मेहसाणा, अकोला, प्रभानी।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा चुनौती
बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने को एक महत्वपूर्ण चुनौती करार देते हुए मानव संसाधान विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने आज उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि शिक्षा सुधार के क्षेत्र में वह जल्दबाजी में कदम उठा रहे हैं। देश के विभिन्न क्षेत्रों में 31 नवोदय विद्यालयों के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए सिब्बल ने कहा कि लोग कहते हैं कि हम शिक्षा के क्षेत्र में सुधार में जल्दबाजी कर रहे हैं। लेकिन हम कहते हैं कि हमारे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1985 में कहा था कि बच्चों को चंद महीनों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राजीव गांधी के कथन के 25 वर्ष बाद भी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मुहैया करा पाए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को सुलभ एवं उत्कृष्ठ शिक्षा प्रदान करने की दिशा में नवोदय विद्यालय एक अनूठा प्रयास है जिसका उद्देश्य ग्रामीण प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान करना और उनका विकास सुनिश्चित करना है। सिब्बल ने कहा कि नवोदय विद्यालय में 74 प्रतिशत ऐसे बच्चे हैं जिनके माता-पिता की आय अत्यंत निम्न है जबकि 41 प्रतिशत बच्चे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं। उन्होंने कहा कि हमारी 21वीं सदी की सोच इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के विचारों से काफी हद तक प्रभावित रही है और आने वाले समय में देश के सभी बच्चों को सर्वसुलभ शिक्षा मुहैया कराने के लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा। |