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संयुक्त राष्ट्र। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में संयुक्त राष्ट्र भी महिलाओं की रक्षा नहीं कर पा रहा है। देश में सिर्फ तीन दिनों में महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म के 242 मामले सामने आए हैं।
जुलाई और अगस्त में सामने आए इन मामलों की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने शांति अभियान के संयुक्त राष्ट्र सहायक महासचिव अतुल खरे को कांगो भेजा था। खरे ने इस भयावह तस्वीर की जिम्मेदारी देश की सरकार पर डालते हुए सुरक्षा परिषद से कहा कि सुरक्षा की जिम्मेदारी किनशासा की है , लेकिन ‘हम भी इस मामले में असफल साबित हुए हैं।’ संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक उत्तरी किवू प्रांत के 13 गांवों में माय माय मिलिशिया और एक अन्य विद्रोही संगठन के आतंकवादियों ने 30 जुलाई से दो अगस्त के बीच कम से कम 242 महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इन महिलाओं में 28 अवयस्क लडकियां भी शामिल थीं। खरे ने कहा कि हमारे प्रयास काफी नहीं थे, जिसका परिणाम इस पूरी तरह अस्वीकार्य नृशंसता के तौर पर सामने आया है। हमें और बेहतर करना ही चाहिए था।
यौन हिंसा के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र की शीर्षस्थ अधिकारी मार्गरेट वॉलस्टोर्म ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र , अपने स्तर पर अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकता। खरे और मार्गरेट दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि कांगो सरकार को दोषियों के खिलाफ कडी कार्रवाई करनी चाहिए। सुरक्षा परिषद ने कांगो सरकार से कहा कि वह ऐसे अपराधों पर लगाम कसे।
वैश्विक निकाय के वर्तमान अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र में तुर्की के राजदूत अर्तुग्रुल अपाकन ने कहा कि हम इन दुखद घटनाओं की कठोर शब्दों में निंदा करते हैं। |