भोपाल । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने बरकतउल्ला विवि के प्रौढ सतत शिक्षा विभाग को बंद करने के निर्देश जारी कर दिया है। साथ ही एपीएस विवि, रीवा विक्रम विवि, उज्जैन में संचालित प्रौढ सतत शिक्षा विभाग को भी बंद करने के निर्देश दिए गए है। सत्र 2010-11 की हुई समीक्षा बैठक में इस फैसले पर अंतिम मुहर लगा दिया गया है। यूजीसी सूत्रों के अनुसार प्रौढ सतत शिक्षा विभाग द्वारा निरंतर यूजीसी नियमों का पालन नहीं करने और अनुदान राशि में अनियमितता का मामले सामने आने पर यूजीसी ने यह कदम उठाया है।
बरकतउल्ला विवि के प्रौढ सतत शिक्षा विभाग के तहत चार पाठ्यक्रम संचालित किए जाते थे, लेकिन विगत तीन वर्ष में इन पाठ्यक्रमों की विद्यार्थियों के एक भी दाखिला नहीं हुए। मजबूरन प्रौढ विभाग ने बीएड सहित अन्य कोर्स के माध्यम से आय अर्जित किए गए, जो कि इस विभाग के अंतर्गत संचालित नहीं किए जा सकते है।
गैर जिम्मेदराना काम के कारण बंद
बरकतउल्ला विवि में प्रौढ सतत शिक्षा विभाग को बंद करने का मुख्य कारण विभागाध्यक्ष द्वारा गैर जिम्मेदराना काम करना भी बताया जा रहा है। विवि सूत्रों के अनुसार यूजीसी को उपयोगिता प्रमाण पत्र सहित अन्य जानकारी समय पर नहीं भेजी जाती थी। साथ ही चार पाठ्यक्रम को शुरू करने में विभाग पूर्ण रूप से विफल रहा है। यहां यह बताया जा रहा है कि प्रौढ सतत शिक्षा के तत्कालीन विभागाध्यक्ष कालिका यादव द्वारा कई जानकारी यूजीसी से छुपाने का मामला भी सामने आया है। इससे पूर्व भी यूजीसी की अधिकारी एचके चौहान ने तत्कालीन कुलपति आरएस सिरोह के समक्ष भी इसको लेकर विभागाध्यक्ष कालिका यादव को फटकार लगाई थी।
देवी अहिल्या विवि को मिली मंजूरी
यूजीसी ने अपनी बैठक में देवी अहिल्या विवि, इंदौर में प्रौढ सतत शिक्षा को मंजूरी दे दी है। इसके लिए कुल 9 लाख रुपए के बजट आवंटित किए गए है। इसके अलावा जीवाजी विवि को इस कोर्स को संचालित करने के लिए मंजूरी दी गई है। |