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कूनो-पालपुर अभ्यारण्य में दहाडेंगे अफ्रीकी चीते
On 9/9/2010 9:15:42 PM

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भोपाल। सबकुछ ठीक रहा तो अगले कुछ वर्षों में प्रदेश के कूनो-पालपुर वन्य प्राणी अभ्यारण्य में चीतों की दहाड सुनाई देगी, क्योंकि अभ्यारण्य अगले कुछ वर्षों में अफ्रीकी चीतों का रहवास बन जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को प्रदेश के इस अभ्यारण्य में अफ्रीकी चीतों के पुनस्र्थापन की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की। मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में भारतीय वन्य प्राणी संस्थान और भारतीय वन्य प्राणी न्यास द्वारा प्रोजेक्ट चीतापर केन्द्रित प्रस्तुतीकरण देख रहे थे। प्रख्यात वन्य प्राणी विशेषज्ञ और प्रदेश के पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और वर्तमान में भारतीय वन्य प्राणी न्यास के अध्यक्ष रणजीत सिंह ने प्रोजेक्ट चीतासंबंधी प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में अंतिम बार अब से 62 वर्ष पहले वर्ष 1948 में चीता देखा गया था।

एशिया में दुर्लभ वन्य प्राणीः आज की स्थिति में मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में चीता नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार न केवल भारत बल्कि ईरान को छोडकर जहां वर्तमान में 50 से ज्यादा चीते हैं, पूरे एशिया में इस दुर्लभ वन्य प्राणी का अस्तित्व नहीं है।

खर्च होंगे 300 करोड रुपए

रणजीत सिंह के अनुसार प्रदेश के कूनो-पालपुर अभ्यारण्य में चीतों के पुनर्स्थापन की दस साल की योजना पर 300 करोड रुपए का व्यय होने का अनुमान है। यह राशि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से वहन की जाएगी।

देश में 3 स्थल उपयुक्त

केन्द्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा तैयार प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत वन्य प्राणी विशेषज्ञों ने अफ्रीकी देशों के चीतों की भारत में बसाहट के लिए तीन स्थलों को उपयुक्त पाया है। इन तीन स्थलों में प्रदेश के कूनो-पालपुर और नौरादेही अभ्यारण्य के अलावा राजस्थान का शाहगढ क्षेत्र शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार, कूनो-पालपुर अभयारण्य बाघ, तेंदुआ, एशियाई सिंह के साथ ही चीता के आश्रय स्थल की आदर्श जगह है।

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