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कथनी और करनी में अंतर क्यों है?
On 9/9/2010 9:29:56 PM

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अपने देश में शादी के समय धार्मिक रीति-रिवाज निभाए जाते हैं। अग्नि के समक्ष फेरे लेते वक्त एक-दूजे के होने की कसमें खाई जाती हैं। विवाहों में नाते-रिश्तेदार भी शामिल होते हैं। विवाह के बंधन को पवित्र माना जाता है, पर क्या वास्तव में ऐसा है भी? पिछले दिनों एक राजनीतिक पार्टी से जुडे एक नेता की खबर सुर्खियां बनी थी। उसने ढाई साल के भीतर एक ही शहर में दो परिवार बसाए थे। दोनों पत्नियों के साथ बाकायदा शादी की थी, पर दोनों में से किसी को भी इसकी भनक तक नहीं लगी थी। एक दिन गलती से नेताजी का एक मोबाइल पहली पत्नी के पास छूट गया और तभी दूसरी पत्नी का फोन आ गया। वह अनजान महिला की आवाज सुनकर भौचक्की रह गई। दोनों ने स्वयं को नेताजी की पत्नी बताया। दोनों अपनी-अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचीं, पर बाद में काफी झगडे के बाद समझौता हो गया और शिकायत दर्ज नहीं हुई। नेता की इस हरकत का पता चलने के बावजूद आखिर क्या वजह रही होगी कि उसकी दोनों पत्नियों ने समझौता कर लिया? उस पुरुष ने तो दोनों से यही कहा होगा कि गलती हो गई, माफ कर दो।

अकसर पत्नियां माफ कर देती हैं। पता नहीं, इसका कारण उनका विशाल हृदय होना है या किसी भी तरह से परिवार को बचाए रखना या फिर यह धारणा कि आदमी तो ऐसा कर ही सकता है? बात यह नहीं है कि सिर्फ आदमी ही इस प्रकार की धोखाधडी करता है। कई बार तो महिला को पता होता है कि सामने वाला पुरुष शादी-शुदा है, तो भी वह दूसरी पत्नी बनने को तत्पर हो जाती है। दरअसल, आमतौर पर पुरुष दूसरे रिश्ते के लिए यही कहता है कि पहला रिश्ता तो वह मजबूरी में निभा रहा है। परिवार, समाज या बच्चों का कारण बता दिया जाता है और दूसरी वाली का दिल भी पिघल जाता है। ऐसे मामलों में पुरुष तो धोखाधडी करता ही है, पर दूसरी औरत का व्यवहार भी धोखाधडी की श्रेणी में ही आता है।

हाल ही में सात महीने की गर्भवती नाइजीरिया की अन्ना की खबर सुर्खियां बनी थी, जो अपने पति को ढूंढने के लिए भारत आई है। 2008 में उसने नाइजीरिया में भारतीय सेना के अधिकारी रह चुके विभूति चटर्जी से शादी की थी। इस साल मई में विभूति गर्भवती अन्ना को छोडकर भारत आ गया। इसके बाद वह अन्ना के फोन, -मेल आदि का जवाब नहीं दे रहा था। हारकर अन्ना भारत आई है। जब वह अपने पति विभूति के घर दिल्ली के सैनिक एन्क्लेव गई, तो वहां बाहर उसने विभूति की पत्नी को देखा, जिसके बारे में विभूति ने बताया था कि वह मर चुकी है। 2009 में ब्रिटेन के हंसला मिडिल की रहने वाली वैजयंती भी अपने पति को ढूंढने फरीदाबाद आई थी। 2005 में उसने फरीदाबाद के अनिल कुमार से ब्रिटेन में शादी की थी। इस दौरान अनिल ने वैजयंती के पैसे से फरीदाबाद में पांच प्रोपर्टियां खरीद लीं और 2008 में वह फरीदाबाद लौट आया।

वैजयंती जब अनिल के घर गई, तो उसने मारपीट करके उसे भगा दिया और पुलिस ने भी केस दर्ज करने से मना कर दिया। हारकर वह किसी तांत्रिक के चक्कर में पडी, जिसने सात लाख 50 हजार की कुछ मालाएं और पत्थर उसे बेचे। बाद में कोई फायदा नहीं देखकर उसने थाने में शिकायत दर्ज कराई और तांत्रिक गिरफ्तार हो गया। दरअसल, बात यह नहीं है कि दूसरा, तीसरा या कितने भी संबंध बनाना गलत है, गलत आत्मीयता से बनाए जाने वाले रिश्ते में सब कुछ छिपा लेना है। यह हमारे समाज में व्याप्त दोहरेपन का उदाहरण है कि एक तरफ नैतिकता का रट्टा लगाया जाता है और दूसरी तरफ बुनियादी शराफत भी नहीं दिखाई जाती। यदि ऐसी घटनाएं अपवादस्वरूप होतीं, तो चिंता की बात नहीं थी, पर अब इनका चलन बढ रहा है। ऐसे मामलों में जरूरी नहीं कि दूसरी शादी भी हो ही। विवाहेत्तर रिश्ते चलाना भी धोखाधडी ही है। ऐसे रिश्तों का चलन तो चिंताजनक स्तर तक बढ गया है। शादी को पवित्र बंधन कहने वाले लोग ऐसे संबंध क्यों बनाते हैं? खोट लोगों की मानसिकता में होती है या फिर वह पवित्र बंधन में ही है? हमारे समाज की हकीकत यही है कि यहां केवल नैतिकता के पाठ ही पढाए जाते हैं, उन पर अमल कोई नहीं करता। इसी नैतिकता के कारण लोगों ने शराफत तक छोड दी है।

--अंजलि सिन्हा

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