| | संक्रमण का संकट | | | |
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भोपाल। राजधानी में बहुत तेजी से संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं। इनसे सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं को है। राजधानी में अब तक स्वाइन फ्लू से 17 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 4 गर्भवती महिलाएं हैं। इससे अस्पतालों में भर्ती गर्भवती महिलाएं दहशत में हैं। शहर में सबसे अधिक प्रसव सुल्तानिया, इंदिरागांधी और जेपी अस्पताल में होते हैं।
राजधानी में मिले स्वाइन फ्लू के आठ मामले पॉजीटिव
भोपाल । राजधानी में गुरूवार को स्वाइन फ्लू के 8 मरीजों की रिपोर्ट पॉजीटिव आई है। जबकि 14 सैम्पल जांच के लिए भेजे गए हैं। भोपाल से अब तक दो सौ अधिक सैम्पल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। जिनमें 70 मरीजों की रिपोर्ट पाजीटिव प्राप्त हुई है और प्रदेश में सबसे अधिक 17 मरीजों की मौत हो चुकी है। राजधानी में अभी भी 6 मरीजों की हालत नाजुक बनी हुई है। जिनका इलाज हमीदिया एवं निजी अस्पतालों में चल रहा है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार इन मरीजों को वेंटीलेटर पर रखा गया है। 45 मरीज भर्ती हैं जिन्हें स्वाइन फ्लू की दवाएं देकर चिकित्सक उपचार कर रहे हैं।
सुल्तानिया में ज्यादा खतरा
राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सुल्तानिया अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा संक्रमण का खतरा है , क्योंकि अस्पताल के वार्डों में गंदगी पसरी हुई है। इससे बढते संक्रमण से अस्पताल प्रबंधन या तो वाकिफ नहीं है या फिर जानबूझ कर लापरवाही बरत रहा है। यही हाल इंदिरागांधी अस्पताल का है जहां गर्भवती महिलाओं को संक्रमण से बचाने के लिए कोई उपाय नहीं किए गए हैं।
मौसमी बीमारियों पर रोक के लिए सफाई जरूरी
भोपाल। राजधानी में इस समय मौसमी बीमारियों के अलावा डेंगू , मलेरिया, स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों का जोर है। इसके लिए नगर निगम ने विभिन्न वार्डो में साफ-सफाई की जरूरत समझी जा रही है। अभी हाल में ननि ने अभियान चलाकर वार्डो से 116 ट्रिप कचरा हटाया है, पर यह अपर्याप्त साबित हो रहा है। ननि ने प्रत्येक वार्डो में सफाई अभियान चला कर 116 ट्रिप कचरा निकाला है। नियमित सफाई करने की जरूरत प्रत्येक वार्डो में महसूस की जा रही है। जहां जल भराव क्षेत्र ज्यादा है वहां कीटनाशकों का छिडकाव कराने की मांग भी स्थानीय लोगों ने की है। |
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