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भोपाल। बस रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (बीआरटीएस) के तहत बनाए जा रहे बस कॉरिडोर का निर्माण महज 40 फीसदी ही हो पाई है, ऐसे में इन सडकों पर बसें कैसे चलेगी, यह पहेली बन गई है। ऐसा इसलिए और है कि यह बसें बडे महानगरों की तर्ज पर चलाने के लिए आ रही है, और सडकें काफी खस्ताहाल है। पायलट परियोजना के तहत दो साल बीतने के बाद भी सडकें नहीं बन पाई।
बीआरटीएस रूट मिसरोद से बैरागढ तक में 30 मीटर चौडी सडक के अलावा 86 स्टापेज भी बनाए जाने हैं। यह सभी स्टापेज बडे महानगरों दिल्ली व मुंबई की तर्ज पर होगी। इस बस रूट पर आलीशान नक्शों के साथ सभी जरूरी जानकारी होगी। पर न तो अत्याधुनिक स्टापेज बन पाई है और न ही कोई अन्य व्यवस्था।
बसें आने के लिए तैयार पर प्रस्ताव ही पेश नहीं
स्टापेज बनाने वाले प्रस्ताव की रूपरेखा अभी तक महापौर परिषद में पेश भी नहीं हो पाया है। अब पेश होने पर स्वीकृति के बाद इस पर काम शुरू होगा। सभी 86 स्टापेज के लिए 14 करोड रुपए की लागत आएगी। पर इसे बनाने वाली एजेंसी को लेकर अभी से उहापोह की स्थिति है। इसे लेकर खींचतान भी हो रही है।
निर्माण एजेंसी को लेकर बुना गया ताना -बाना
योजना को मूर्त रूप देने से पहले अंदर ही अंदर एजेंसी के चयन की जानकारी भी मिली है। सूत्रों ने बताया कि पर शासन व ननि के कुछ अफसरों की कोशिश है कि यह काम उनके चहेते एजेंसी को ही मिले।
अधूरे रूट से अफसरों की मुश्किलें बढी
बस कॉरिडोर रूट अधूरी है। रूट निर्माण कार्य महज 30 फीसदी ही पूरा हो पाएगा, जब कि 105 बसें इसी सितंबर महीने में कुछ ही दिनों में आ जाएंगी। शर्तो के अनुसार बसों को ले आना जरूरी हो गया है, ऐसे में अफसरों की मुश्किलें बढ गई है।
सडक नहीं तो कैसे बीचोबीच बनेगा स्टापेज
बस कॉरिडोर में स्टापेज सडक के बीचो -बीच होगा। ऐसा इसलिए है कि बस की रफ्तार को बिना किसी दिक्कत के यात्रियों को सुविधानुसार गंतव्य तक पहुंचाया जा सके। 30 मीटर चौडे पायलट कॉरिडोर में बसों का रूट अलग होगा। इस रूट में को जाम से बचाने के लिए भी योजना बनाई गई है। पर जब सडक ही नहीं है तो बीचो-बीच स्टापेज कैसे बन पाएगी।
इसी महीने शुरू होगी बसें
बीआरटीएस के प्रभारी एमएम गर्ग ने बताया कि 105 बसें इसी महीने से चलना शुरू हो जाएगी। 75 बसें इंदौर आ चुकी हैं। बाकी बसें भी आ जाएंगी। बसों को चलाने में आने वाली दिक्कतों को दूर कर लिया गया है। इसलिए अब कोई समस्या नहीं रह गई है। |