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सलेम को फांसी संभव
On 9/10/2010 8:20:10 PM

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नई दिल्ली। सुनवाई के दौरान अंडरवर्ल्ड डॉन अबु सलेम के चेहरे पर दिखाई देने वाली अजीब सी मुस्कान शायद अब दिखाई न दे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सलेम को मौत की सजा भी सुनाई जा सकती है। हालांकि पुर्तगाल से सलेम का प्रत्यार्पण इसी शर्त पर हुआ था कि उसे सजा--मौत नहीं दी जाएगी। न्यायमूर्ति पी सथाशिवम और अशोक कुमार गांगुली की बेंच ने फैसला दिया कि अबु सलेम पर आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या और धारा 120 बी के तहत आपराधिक षड्यंत्र का मुकदमा चल सकता है। इसके अलावा उस पर 1993 के मुंबई विस्फोटों के सिलसिले में टाडा के तहत भी मुकदमा चलाया जाएगा।

अदालतों पर कोई शर्त नहीं

उच्चतम न्यायालय ने सलेम के इस तर्क को खारिज कर दिया कि उस पर मौत की सजा वाले अभियोग नहीं चलाए जा सकते क्योंकि पुर्तगाल ने इसी शर्त पर प्रत्यर्पण किया था। सरकारी वकील ने तर्क दिया कि पुर्तगाल की सरकार भारतीय अदालतों पर कोई शर्त नहीं लगा सकती। सरकारी वकील की ओर से यह भी कहा गया कि मौत की सजा को लेकर सलेम परेशान है क्योंकि सुनवाई अभी पूरी नहीं हुई है और सजा पर अभी फैसला नहीं हुआ है।

2005 को हुआ था प्रत्यर्पण

पुर्तगाल से वर्ष 2005 में प्रत्यर्पण के बाद से ही 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों का मुख्य अभियुक्त 42 साल का सलेम मुंबई की जेल में बंद है। वह हत्या के दो मामलों सहित नौ अभियोगों का सामना कर रहा है।

कुछ भी गलत नहीं

उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में पुर्तगाली अधिकारियों की पूर्व शर्त से सहमति नहीं होने का संकेत दिया। कोर्ट ने कहा, दोनों देश आतंकवाद को खत्म करने के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पर सहमत हैं इसलिए उसके खिलाफ टाडा और आईपीसी की विभिन्न धाराएं लगाने में कुछ भी गलत नहीं है। सलेम को राजग सरकार के समय में पुर्तगाल से इस आधार पर प्रत्यर्पित किया गया था कि तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और विदेश राज्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वादा किया था कि उसे मौत की सजा नहीं दी जाएगी।

रिजवानुर मामले में जांच पर रोक

रिजवानुर रहमान हत्याकांड में उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी जिसमें सीबीआई को नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया गया था। न्यायमूर्ति पी सदाशिवम और बीएस चौहान की एक पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश के अमल से होने वाली आगे की सभी कार्यवाहियों पर भी रोक लगा दी। अदालत ने इस संबंध में सीबीआई को रिजवानुर के ससुर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने आरोपियों को मामले की सुनवाई करने वाले जज के समक्ष जमानत के लिए फिर से मुचलके का आवेदन करने को कहा।

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