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भारत-चीन तनाव बढने का खतरा
On 9/10/2010 9:20:11 PM

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ओबामा की भारत यात्रा को लेकर दोनों देशों में उत्साह का माहौल है, वहीं चीन इसे लेकर असहज है। उसका मानना है कि तिब्बत मसले पर दोनों देश एक हो सकते हैं।

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा नवंबर में भारत की अपनी पहली यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह बात अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पीजे क्रोले ने कही है, पर ओबामा की यह यात्रा कुछ विवादों की जमीन भी तैयार करती दिख रही है। क्रोले ने वॉशिंगटन में कहा कि अच्छे भारत-अमेरिका संबंध न केवल एशिया, बल्कि पूरी दुनिया के लिए जरूरी हैं, इसलिए ओबामा को उनकी भारत यात्रा का बेसब्री से इंतजार है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान, जलावायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दे एजेंडा में शामिल रहेंगे। पर कुछ मुद्दे ऐसे हैं, जो न केवल भारत, बल्कि चीन का भी गुस्सा भडका सकते हैं। ऐसा ही एक मुद्दा तिब्बत का है। अमेरिकी कांग्रेस में पिछले महीने पेश सालाना रिपोर्ट में चीन सरकार और दलाई लामा के बीच ठोस और विस्तृत बातचीत की वकालत की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक बीजिंग और दलाई लामा के बीच ठोस व विस्तृत बातचीत को बढावा देना अमेरिकी विदेश नीति का अहम हिस्सा है। हम चीनी गणराज्य और दलाई लामा को बिना शर्त बातचीत को बढावा देने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

यही नहीं, अमेरिका ने हाल ही में नेपाल सरकार से भी अपील की कि वह वाया नेपाल भारत जाने वाले तिब्बतियों को परेशान नहीं करे। हालांकि, इसके बावजूद नेपाल द्वारा ऐसे तिब्बती लोगों को पकड कर चीन के हवाले किए जाने की खबरें आ रही हैं। ऐसे में तिब्बती ओबामा की भारत यात्रा से उम्मीदें पाले बैठे हैं। हिमाचल प्रदेश में बडी संख्या में रह रहे तिब्बती ओबामा की यात्रा के दौरान अपनी बात उन तक पहुंचाने की योजना बना रहे हैं। कई विशेषज्ञों की भी राय है कि ओबामा की भारत यात्रा के दौरान एजेंडे में तिब्बत का मसला भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि चीन लगातार तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से भारत के किसी नेता की मुलाकात का विरोध करता रहा है। पिछले महीने भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से उनकी मुलाकात पर चीन ने ऐतराज जताया था। यह तय है कि ऐसा कुछ होने पर ओबामा की यात्रा पर भी चीन विवाद खडे करेगा। ओबामा की यात्रा से जुडी खबरों में एक खबर यह भी है कि वह बेंगलुरु जाने से बच सकते हैं। यह भी विवाद का एक मुद्दा बन सकता है। खासकर तब जब ओबामा लगातार भारत के आईटी सेक्टर पर चोट करने वाले फैसले ले रहे हैं और बयान दे रहे हैं। बेंगलुरु भारत का आईटी हब है।

यात्रा से दोनों देशों के संबंधों को मिलेगी नई दिशाः रोमर

नई दिल्ली। भारत में अमेरिका के राजदूत टिमोथी रोमर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा नवंबर में होने वाली अपनी भारत यात्रा को लेकर उत्साहित हैं। इस यात्रा से आतंकवाद निरोध और उभरते व्यापारों समेत अन्य क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक भागीदारी मजबूत होने की उम्मीद है। रोमर ने कहा कि ओबामा की भारत यात्रा असाधारण और उच्चस्तर की होगी तथा यह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रति अमेरिकी राष्ट्रपति के गहरे सम्मान को प्रदर्शित करता है। गृह मंत्री पी चिदंबरम से मुलाकात के बाद रोमर ने बताया कि जब मैं इन गर्मियों में अमेरिका में अपने घर लौटा और व्हाइट हाउस गया तो वहां काफी उत्साह का माहौल था।

इस यात्रा को लेकर न सिर्फ राष्ट्रपति बल्कि नेतागण और देश का हर आदमी उत्साहित है। राजदूत ने कहा कि नवंबर की शुरूआत में ओबामा की प्रस्तावित यात्रा को लेकर भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों के बीच काफी बैठकें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति इसे दोनों देशों के बीच 21 वीं शताब्दी में अनिवार्य भागीदारी बताते हैं। रोमर ने कहा कि उन्होंने ओबामा की प्रस्तावित भारत यात्रा के बारे में चिदंबरम के साथ चर्चा की और इस बारे में भी कि कैसे दोनों देश तथा सभी नेता इसको लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि हमने इस बारे में बातचीत की कि कितने करीब से अमेरिका और भारत आतंकवाद निरोध के मुद्दों पर काम कर रहे ह। तकनीकी स्तर पर और सामरिक स्तर पर। हमने भविष्य में इस सहयोग को बढाने के अवसरों पर चर्चा की।

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