| | प्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति से हों छात्रसंघ चुनाव | | | |
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प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने छात्रसंघ चुनाव की तिथियां घोषित कर दी हैं। यदि छात्र संगठनों ने उपद्रव नहीं मचाया या वे न्यायालय की शरण में नहीं गए , तो फिर प्रदेश के विश्वविद्यालयों -महाविद्यालयों में छात्रसंघों के चुनाव वैसे ही होंगे, जैसे अब तक होते रहे हैं। यानी, अप्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति से। उल्लेखनीय है कि जबलपुर उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की याचिका पर राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि छात्रसंघ के चुनाव लिंगदोह समिति की सिफारिशों के आधार पर ही कराए जाएं। जब सरकार यह निर्णय मानने को तैयार ही नहीं है, तो छात्र भी अदालत जाने के लिए स्वतंत्र हैं।
भला सेवानिवृत्त आईएएस जेम्स माइकल लिंगदोह की सिफारिशों में ऐसा है क्या , जिसको मानने में हमारी सरकार को दिक्कत आ रही है? लिंगदोह समिति का गठन 2005 में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तब किया था, जब केरल में छात्रसंघ निर्वाचन को लेकर विवाद हो गया था और वहां के हाईकोर्ट ने यह चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने के पक्ष में निर्णय दिया था। यह मुकदमा सुप्रीम कोर्ट में आया, तो उसने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को निर्देश दिया था कि वह एक समिति बनाए और तय करे कि ये चुनाव कैसे कराए जाने हैं? सही है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय में कोई व्यवस्था नहीं दी, पर चूंकि लिंगदोह समिति उसी के निर्देश पर बनी थी, इसलिए उसकी सिफारिशों के साथ सुप्रीम कोर्ट की सहमति भी जुडी हुई है। सच भी वही है, जो लिंगदोह समिति ने कहा है कि छात्रसंघ चुनावों का ध्येय यदि छात्रों में लोकतांत्रिक संस्कार विकसित करना है, तो यह अप्रत्यक्ष निर्वाचन के जरिए पूरा नहीं होता। लिहाजा, प्रदेश में भी छात्रसंघ के चुनाव प्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति से हों, ताकि उनमें छात्रों की भागीदारी बढे। |
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