लेकिन वाहनों तक लगने में चार माह का टाइम लग गया। लेकिन अभी तक कंट्रोल रूम से इसका संफ नहीं हो पाया है।
कई तकनीकी कमियांः पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जीपीएस सिस्टम की टेस्टिंग की जा रही है। जिसमें अभी कई कमियां आ रही है उनको ठीक होने के बाद ही कनेक्टविटी चालू हो सकेगी।
नहीं बैठ रहा फिटः प्रारंभिक रूप से जीपीएस सिस्टम की टेस्टिंग में सामने आया है कि अभी वाहनों की लोकेशन सही नहीं बता पा रहा है। भोपाल के मैप के हिसाब से फिट नहीं बैठ रहा जिस इसके संचालन में जो तकनीकी दिक्कते आ रही है जिससे कंपनी इंजीनियर उन्हे सुधारने का काम किया जा रह रहे हैं। साथ जब मोबाइल कंपनियां टावर लोकेशन प्रोवाइड करेंगी तभी सिस्टम चालू होने के बाद कॉलर की पूरी डिटेल मिल सकेगी।
स्क्रीन में दिखेगी लोकेशनः कनेक्टिविटी होने के बाद पुलिस के सारे वाहन कंट्रोल रूम स्थित सेंटर से जुड जाएगे। कम्प्यूटर स्क्रीन पर सभी वाहनों की लोकेशन को देखा जा सकेगा। साथ ही मैसेज का भी आदान प्रदान किया जाएगा। इसमें आने वाले सारे काल्स रिकार्ड होंगे और मैसेज भी जीपीएस युनिट और कंट्रोल रूम में लगे कंप्यूटर्स पर डिस्प्ले होगा।