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..और यहां बच्चे छिलकों से भरते हैं अपना पेट
On 1/28/2012 9:45:13 PM

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शहडोल/कनाड़ी। दीनदयाल स्व-सहायता समूह के द्वारा ग्राम पंचायत कोठीगढ़ के अन्तर्गत आने वाले पॉच सभी प्राथमिक, माध्यमिक, आंगनबाड़ी विद्यालयों के लिए एमडीएम की व्यवस्था देखी जा रही है। गौरतलब है कि इतने सारे व्यवस्था एक व्यक्ति के हाथो से संभालना मुश्किल होता है। पर बच्चों के हक पर डांका डालकर इस समूह द्वारा अपने अधिकारियों को मनाकर खुद ही इन सभी विद्यालयों के बच्चो के लिये भोजन देने का जिम्मा ले लिया गया है।

शिक्षकों की मिलीभगत

जिस तरीके से समूह द्वारा गैर जिम्मेदार व तानाशाह निरंकुश होकर कार्य किया जा रहा है, उस पर कहीं न कहीं विद्यालयों के शिक्षको द्वारा प्राथमिक और अंतिम मोहर लगाई जाती है। और भ्रष्टाचार व कमीशन के माला में गुथें ये शिक्षक भी कुछ अंश पाने के बाद चुप्पी साध लेते हैं, और स्व-सहायता समूह द्वारा की जा रही मनमानी को ऑख बंद कर न देखने का बहाना करते रहते हैं।

अनुपस्थिति में उपस्थिति

शिक्षक और समूह द्वारा बच्चों के न आने पर उनकी उपस्थिति पंजी पर उपस्थित दर्शाकर उनके कोटे में आई मध्याह्न् भोजन के लिए राशि का स्वयं ही उपभोग मिल बांटकर कर लिया जाता है, और बच्चों की खुराक पर समूह व इनका गिरोह मिलकर डांका डाल रहा है। और खुराक के लिये आई राशि की होली खेली जा रही है।

कहां मेन्यू कहां खाना

शासन द्वारा बच्चों में पौष्टिकता को ध्यान में रखते हुये भोजन के लिये एक व्यवस्थित मेन्यू का प्रारूप तैयार किया गया है, और उसके लिए आवश्यकता के ज्यादा राशि का खजाना भी इन समूहों के जिम्मे सौंपा दिया है। बावजूद इसके भी स्व-सहायता समूह द्वारा कभी भी मेन्यू के आधार पर बच्चों के लिए भोजन नहीं बनाया जाता है।

आलू की जगह छिलका

स्व-सहायता समूह द्वारा राशि बचाने के मंसूबे से भोजन में आवश्यक खाद्य पदार्थ न डालकर औपचारिकता निभाते हुए कुछ भी बच्चों को खिला दिया जाता है। बच्चों व ग्रामीणजनों की माने तो सब्जी में आलू की जगह आलू की भरपाई करने के लिए उसके छिलके को डालकर बच्चों को खिलाया जाता है। और बेचारे मध्यम व गरीबी रेखा के नीचे निवास कर रहे गरीब घर के बच्चे भूख में छिलके खाकर ही अपना भूख मिटा लेते है।

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