नई दिल्ली । उम्र विवाद मामले में अब ये साफ हो गया है कि सरकार जनरल वीके सिंह से किसी तरह के समझौते के मूड में नहीं है। सरकार ने सेना से सिंह की जन्मतिथि 1950 करने को कहा है। इस संबंध में रक्षामंत्रलय ने सेना की एजूटेंट शाखा (एजी) को पत्र लिखकर कहा है कि वो अपने रिकॉर्ड में जनरल सिंह की जन्मतिथि 10 मई 1950 ही दर्ज करे। सूत्रों के मुताबिक पत्र में पूछा गया है कि एजी शाखा के रिकॉर्ड में जन्मतिथि 1951 क्यों और कैसे दिख रही है। चूंकि मिलेटरी सेक्रेटरी ब्रांच के रिकॉर्ड में जन्मतिथि 10 मई 1950 है, इसलिए एजी शाखा को भी इसके अनुसार रिकॉर्ड दुरुस्त करना चाहिए।
पक्ष मजबूत करने की कवायद
जनरल सिंह ने इस मामले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है, तीन फरवरी को याचिका पर सुनवाई है। सरकार सुनवाई से पहले अपना पक्ष मजबूत करना चाहती है, इसलिए एजी शाखा को एकजैसा रिकॉर्ड तैयार करने को कहा गया है। अगर सरकार ऐसा न करती तो उसे दो तिथियों के चक्कर में कोर्ट के सवालों के जवाब तलाशने पड़ते। गौरतलब है कि जनरल सिंह कहते आए हैं कि उनकी असल जन्मतिथि 1951 है और इसी आधार पर उन्हें रिटायर्ड किया जाना चाहिए।
अब आगे क्या
सरकार के इस कदम के बाद अब दोनों पक्षों में सुलह की कोई उम्मीद नहीं बची है। सरकार पहले भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर चुकी है। अब इस मामले का अंतिम फैसला अदालत में ही होगा। हालांकि ये भी संभव है कि सर्वोच्च न्यायालय सुनवाई करने के बजाए मामले को सेना कोर्ट भेज दे।
अलग-अलग जन्मतिथियां कैसे?
कहीं न कहीं हुई लापरवाही
एजी शाखा आधिकारिक तौर पर सेना के दस्तावेज रखती है। उसका दावा है कि जनरल सिंह की जन्मतिथि 10 मई, 1951 है। हालांकि सेना के सचिव की शाखा में यह 10 मई, 1950 दर्ज है। यहां सवाल ये उठता है कि एक ही व्यक्ति की दो-दो जन्मतिथि रिकॉर्ड में कैसे दर्ज हो सकती हैं। इससे साफ है कि किसी न किसी स्तर पर लापरवाही हुई है।
पहले भी दिया था आदेश
रक्षा मंत्रलय ने इसी तरह का लिखित निर्देश सेना की एजूटेंट शाखा को पहले भी दिया था, लेकिन सेना के अधिकारियों का रिकार्ड रखने वाली इस शाखा ने कुछ स्पष्टीकरण मांगने के आधार पर इस निर्देश को मंत्रलय के पास वापस भेज दिया था। इससे पहले ऐसे भी संकेत मिले थे कि सरकार जनरल सिंह के साथ बीच का रास्ता निकाल सकती है।