बेंगलुरु । बाघों को बचाने की नाकाम होती कोशिश के बीच कर्नाटक सरकार ने नई पहल की है। कर्नाटक ने बाघों की सुरक्षा के लिए स्पेशल टाइगर फोर्स का गठन किया है। इस फोर्स को जंगलों में तैनात किया गया है, ताकि बाघों का शिकार रोका जा सके। यह देश की पहली फोर्स है जिसे हथियारों के साथ निहत्थे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने की खास ट्रेनिंग दी गई है।
स्पेशल टाइगर फोर्स के लोगों को हर पल चौकस रहकर शिकारियों के मंसूबों को बेनकाब करने की ट्रेनिंग दी गई है। हर माहौल में इन्हें अपनी और बाघ की सुरक्षा की ट्रेनिंग दी गई है। कर्नाटक में करीब 300 बाघ रहते हैं, यानी देश में अगर सबसे ज्यादा बाघ किसी राज्य में हैं तो वो है कर्नाटक। कर्नाटक के बांदीपुर टाइगर रिजर्व में 150 बाघ हैं। लिहाजा इन बाघों की रक्षा बड़ी चुनौती है।
एक साल की कठिन ट्रेनिंग
स्पेशल टीम को एक साल की कठिन ट्रेनिंग के बाद बांदीपुर टाइगर रिजर्व में तैनात किया गया है। हथियारों के अलावा इनको वॉकी टॉकी और जीपीएस से लैस किया गया है, ताकि पल पल की जानकारी हेडक्वार्टर तक पहुंच सके। कर्नाटक सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य में बाघों को बचाने में मदद मिलेगी।
मध्यप्रदेश के शिकारी चुनौती
अधिकारियों के मुताबिक स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के सामने बाघों को मध्य प्रदेश के भावरिया ट्राइब से बचाने की चुनौती है। वन विभाग के मुताबिक मध्यप्रदेश की भावरिया जाति जिन्हें बहेलिया ट्राइव से भी जाना जाता है। वो कर्नाटक में घुस आई हैं। ये जाति बाघों का शिकार करने के लिए जानी जाती है। ये शिकारी बेहद चालाक होते हैं। माना जाता है कि एक बार ये बाघों के जंगल में घुस जाएं तो बिना शिकार किए वापस नहीं लौटते हैं। पिछले 6 सालों में 50 से ज्यादा बाघों की मौत हो चुकी है, जिनमें 20 बाघों की मौत शिकार की वजह से हुई है।