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रेफर मरीजों को इलाज में दिक्कतें
On 4/17/2012 6:32:41 PM

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भोपाल। पेट के इलाज के लिए सागर जिले के देबरी से आई कौशल्या बाई को इंडोस्कॉपी कराना थी, लेकिन हमीदिया अस्पताल में यह मशीन तीन साल से खराब है। बीपीएल कार्ड होने के बाद भी इसे एक निजी चिकित्सा संस्थान में जांच कराना पड़ी, जिसमें ढाई हजार रुपए लग गए। यही स्थिति रामलाल रैकवार की रही जो विदिशा जिले की ग्यारसपुर से हार्ट के इलाज के लिए हमीदिया आया था, लेकिन इसकी टीएमटी जांच नहीं हो पाई। ऐसे कई मरीज हैं जो बाहर से हमीदिया, कमला नेहरू, सुल्तानिया सहित अन्य अस्पतालों में रेफर होकर अथवा स्वत: इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें प्रापर इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऐसे मरीजों का दर्द है कि इससे तो वह वहीं अच्छे थे, जहां पहले उनका इलाज चल रहा था।

तीव्र गति से नहीं हो रहा काम

मेडिकल कॉलेज की स्वशासी समिति की बैठक में यह निर्णय लिया जा चुका है कि कई चिकित्सा उपकरण पीपीपी माडल से लगवा लिए जाएं और गामा कैमरा, सीटी स्केन जैसी महत्वपूर्ण जांचें अस्पताल में ही की जाएं इसके लिए नए चिकित्सा उपकरण क्रय किए जाएं, लेकिन चिकित्सा उपकरण खरीदी की रफ्तार धीमी है। इससे मरीजों को नुकसान हो रहा है।

निजी अस्पतालों को मिल रहा लाभ

यह स्थिति केवल हमीदिया की ही नहीं है बल्कि राजधानी के लगभग सभी अस्पतालों की है जहां जांच के लिए चिकित्सा उपकरण नहीं हैं। मरीजों को जांच बाहर से कराना पड़ रही हैं और मरीजों को निजी चिकित्सा संस्थानों में मनमानी कीमत चुकाना पड़ रही है। जेपी में एक्सरे मशीन ने जवाब दे दिया है तो सुल्तानिया में सोनोग्राफी के लिए गर्भवती महिलाएं परेशान हो रही है।

यह मशीनें हैं खराब

एंडोस्कोपी

-- कब से - दो साल से

-- काम - पेट की जांच

-- कितने मरीज प्रतिदिन - 20 से 30

-- निजी चिकित्सा संस्थानों में जांच की फीस - एक से दो हजार रुपए

टीएमटी

-- कब से - तीन साल से

-- काम -ह्दय में आक्सीजन की कमी एवं धड़कन की जांच

-- कितने मरीज प्रतिदिन - 20 से 30

-- निजी चिकित्सा संस्थानों में जांच की फीस - 350 से 500 रुपए

सीटी स्केन

-- कब से - हमीदिया में यह मशीन नहीं है, कमला नेहरू अस्पताल की मशीन पर कराना पड़ती है। यह मशीन भी 6 माह चलती है और 6 माह खराब पड़ी रहती है।

-- कारण - मशीन की उम्र पूरी हो चुकी है

-- काम - शरीर के किसी भी हिस्से की जांच की जा सकती है।

-- कितने मरीज प्रतिदिन - 30 से 40

-- निजी चिकित्सा संस्थानों में जांच की फीस - 2 से 3 हजार रुपए

कैथ लैब रिकार्डर

-- कब से - दो साल से

-- काम - हार्ट की एंजीयोग्राफी की रिकार्डिग कर सीडी तैयार की जाती है। इसे देखकर ही बायपास सर्जरी की जाती है।

-- कितने मरीज प्रतिदिन - 20 से 30

-- निजी चिकित्सा संस्थानों में जांच की फीस - 10 से 12 हजार रुपए

आडियोमेट्री

-- कब से - तीन साल से

-- काम - बहरेपन की जांच

-- कितने मरीज प्रतिदिन - 15 से 20

-- निजी चिकित्सा संस्थानों में फीस - 250 से 300 रुपए

टीयूआर

-- कब से - 6 माह से

-- काम - प्रोस्टेट की जांच

-- कितने मरीज प्रतिदिन - 20 से 30

-- निजी चिकित्सा संस्थानों में जांच की फीस - जांच सहित करीब 15 हजार में इसका ऑपरेशन किया जाता है।

गामा कैमरा

-- कब से - चार साल से

-- काम - शरीर के किसी भी हिस्से की संपूर्ण जांच की जाती है

-- कितने मरीज प्रतिदिन - कैंसर एवं रेडियोलॉजी विभाग में

हर दिन 5 से 10 मरीज पहुंचते हैं।

-- निजी चिकित्सा संस्थानों में जांच की फीस - यह कैमरा राजधानी में केवल जवाहर लाल कैंसर अस्पताल में है। जहां एक जांच के 5 से 7 हजार रुपए लगते हैं। जबकि हमीदिया में केवल 500 रुपए में जांच की जाती थी।

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