खबर बहुत छोटी-सी है। इस मायने में कि जब पाकिस्तान एक अलग देश है, तो हमारा उससे क्या लेना-देना? हमारा मतलब उससे उतना ही है, जितना एक पड़ौसी का दूसरे से होता है। मगर, इस मायने में यह खबर बहुत बड़ी है कि पाकिस्तानियों की समझ में यह बात आ ही जानी चाहिए कि उनके देश का इतिहास भारत के बिना नहीं लिखा जा सकता। क्या है, वह खबर? वह यह है कि पाकिस्तान के ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन ने हमारी आकाशवाणी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में कहा गया है कि आकाशवाणी पाक को वह भाषण उपलब्ध कराए, जो मोहम्मद अली जिन्ना ने 11 अगस्त-1947 को कराची में दिया था। दरअसल, उस भाषण में यह था कि जिन्ना कैसा पाकिस्तान चाहते थे? वह पीढ़ी अब रही नहीं, जिसने जिन्ना के साथ पाकिस्तान बनाने का सपना देखा था, तो अब नई पीढ़ी को कैसे बताया जाए कि जिन्ना की कल्पना में कैसा पाकिस्तान था? तब हमें यह पत्र लिखा गया है।
पता नहीं, मोहम्मद अली जिन्ना के उस भाषण की रिकार्डिग हमारी आकाशवाणी के पास है भी या नहीं? मगर, यह बात पीढ़ी-दर-पीढ़ी भारत में बताई जाती रही है कि जिन्ना ने पाकिस्तान का निर्माण किया तो मुसलमानों के लिए था, पर उन्होंने ऐसे पाक की कल्पना नहीं की थी, जो कट्टरपंथी होता, बल्कि उनके सपनों का पाकिस्तान धर्मनिरपेक्ष था। यह बात पाकिस्तानियों को भी प्रारंभ में बताई जाती रही है, पर धीरे-धीरे माहौल बदला, तो यह सिलसिला भी रुक गया। कट्टरपंथ का विस्तार ही तब होता है, जब या तो इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा जाता है या फिर उसे झुठलाया जाता है। इसे यूं भी कहा जा सकता है कि कट्टरपंथी समाज और राजनीति में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए या तो इतिहास को विकृत करते हैं या उसे झुठलाते हैं, वरना उनकी दाल नहीं गलती।
पाकिस्तान में यह दोनों ही काम हुए। तभी तो जिन्ना की जिस विरासत का वहां समग्र लेखा-जोखा होना चाहिए था, वह वहां है ही नहीं। लिहाजा, अब हमारा मुंह ताका जा रहा है और इसमें कोई बुराई भी नहीं है। हम तो यह पहले से ही मानते रहे हैं और यह तो उतना ही अटल सत्य है, जितना कि यह कि सूरज पूरब दिशा में उगता है कि पाकिस्तान की जड़ें भारत में हैं। अलबत्ता, इस सच को पाकिस्तानी झुठलाते रहे हैं। हो सकता है कि अब नई पीढ़ी की मानसिकता बदल रही हो। बदले, तो अच्छी बात है। उनके पास अब भी समय है, जब वे जिन्ना के सपनों का पाक बना सकते हैं, वरना तो उनके देश का ऊपर वाला ही मालिक है।