सलाखों के पीछे दुनिया की सबसे सेक्सी ''खतरनाक हसीन*''आप'' नेता एमएस धीर बीजेपी में शामिल*हिंदू-मुस्लिम मिलकर बना रहे हैं यहां मस्जिद*विश्व के एक तिहाई बच्चे हिंसा का शिकार*जब पर्रिकर भूल गए रजनीकांत का नाम*फेसबुक पर प्यार, लगा 21 लाख का चूना*इधर मोदी लौटे, उधर ऑस्ट्रेलिया भड़क गया*केंद्रीयमंत्री वेंकैया नायडु के साथ स्पेन में लूट*बोको हराम के हमले से नाइजीरिया में 45 लोग मारे गए*अवैध स्कूलों को बंद करेगी कर्नाटक सरकार*
12साल के बच्चों को दही हांडी में शामिल होने की अनुमति नहीं
क्लीनचिट मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट से श्रीनिवासन की गुहार
पति का शक दूर करने कोर्ट ने दिया डीएनए जांच का आदेश
नवाज के लिए किसी बुलेटप्रूफ कार की पेशकश नहीं की गई
मुख्यपृष्ठ राष्ट्रीय विश्व शहर  व्यापार खेल मनोरंजन शिक्षा सम्पादकीय क्लासिफाइड Appointment पत्रिकाएँ आज का पंचांग
सवालों के दायरे में है केंद्र सरकार की मंशा
On 6/8/2012 8:23:05 PM

Change font size:A | A

Print

E-mail

Comments

Rating

Bookmark

कांग्रेस के नेतृत्व वाली धर्मनिरपेक्षयूपीए सरकार आजकल सच्चर कमेटी की सिफारिशों वाली फाइल के पन्ने कुछ ज्यादा ही तेजी से उलटने-पलटने लगी है। बताते चलें कि केंद्र सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजिंदर सच्चर की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था, 9 मार्च-2005 को। इस समिति को काम यह सौंपा गया था कि वह देश के मुस्लिमों की आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक स्थिति का पता लगाए। बहरहाल, समिति ने अपनी सिफारिशें नवंबर-2006 में सरकार को सौंप दी थीं। अब माजरा यह है कि हमारी सरकार जब-तब सनकती व सच्चर समिति की सिफारिशें खोलकर बैठ जाती है, जबकि देश में एक बड़े वर्ग का मानना यह भी है कि सच्चर समिति की सिफारिशें देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के अनुकूल बिलकुल नहीं हैं। हम नहीं कह सकते कि यह धारणा सही है या गलत, पर शुक्रवार को केंद्र ने राज्यों को जिस एक सिफारिश को लागू करने के लिए पत्र लिखा है, उस सिफारिश को सही नहीं माना जा सकता।

केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों के प्रमुख सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि वे सच्चर समिति की सिफारिशों के अनुरूप मुस्लिम बहुल इलाकों के थानों में कम से कम एक मुस्लिम इंस्पेक्टर या सब-इंस्पेक्टर की नियुक्ति जरूर करें, ताकि मुस्लिमों का भरोसा जीता जा सके। यहां दो चुभते हुए सवाल पैदा होते हैं? एक-क्या पुलिस को सांप्रदायिक नजरिए से देखना उचित है? यदि है, तो क्या आगे मुस्लिम न्यायाधीश, मुस्लिम प्रशासनिक अधिकारी आदि की मांग नहीं उठेगी? दूसरा सवाल, क्या मुस्लिम भारतीय शासन-प्रशासन और भारतीयता पर भरोसा नहीं करते हैं? यदि करते हैं, तो चिट्ठी या फिर सच्चर समिति की सिफारिशों में मुस्लिमों का भरोसा जीतने की बात क्यों कही गई है? जरूरत इस बात की है कि सरकार से इन सवालों के जवाब मांगे ही जाएं।

Post Comments
More News
किसान विकास पत्र किसके लिए?...
संत रामपाल का कबीर-पंथ...
इबोला से डरने की जरूरत नहीं...
अब कभी न हो फिजी की उपेक्षा...
विदेशों में भारत की छाप छोड़...
अनिवार्य मतदान अलोकतांत्रिक...
 सम्पर्क करें  विज्ञापन दरें आपके सुझाव संस्थान
© Copyright of Rajexpess 2009,all right reserved.
Developed & Designed By: