अमेरिका में समलैंगिक शादी के विरोध में हुआ प्रदर्श*अक्टूबर तक उपलब्ध होगा मलेरिया का पहला टीका*ब्रिटेन के सबसे धनी व्यक्ति ब्लावन्तिक*विश्व बैंक ने जम्मू कश्मीर के लिए 15 अरब रुपए किए*भूमि बिल पर पुनर्विचार कतई नहीं: वेंकैया*सचिन हुए नाराज, बोले- बेटी नहीं बनेगी हीरोइन*80,000 में हुई डॉगी गुडुलु-मोती की शादी*पाकिस्तानी सेना एक नए ‘तख्तापलट’ की ओर बढ़ी*वकील की नियुक्ति को बताया गलत*चयन पैनल का हिस्सा बनने से इनकार*
विश्व बैंक ने जम्मू कश्मीर के लिए 15 अरब रुपए किए जारी
भूमि बिल पर पुनर्विचार कतई नहीं: वेंकैया नायडू
सचिन तेंदुलकर हुए नाराज,बोले-बेटी नहीं बनेगी हीरोइन
अपने मन की ही सुनते और करते हैं धोनी:अश्विन
मुख्यपृष्ठ राष्ट्रीय विश्व शहर  व्यापार खेल मनोरंजन शिक्षा सम्पादकीय क्लासिफाइड Appointment पत्रिकाएँ आज का पंचांग
सवालों के दायरे में है केंद्र सरकार की मंशा
On 6/8/2012 8:23:05 PM

Change font size:A | A

Print

E-mail

Comments

Rating

Bookmark

कांग्रेस के नेतृत्व वाली धर्मनिरपेक्षयूपीए सरकार आजकल सच्चर कमेटी की सिफारिशों वाली फाइल के पन्ने कुछ ज्यादा ही तेजी से उलटने-पलटने लगी है। बताते चलें कि केंद्र सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजिंदर सच्चर की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था, 9 मार्च-2005 को। इस समिति को काम यह सौंपा गया था कि वह देश के मुस्लिमों की आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक स्थिति का पता लगाए। बहरहाल, समिति ने अपनी सिफारिशें नवंबर-2006 में सरकार को सौंप दी थीं। अब माजरा यह है कि हमारी सरकार जब-तब सनकती व सच्चर समिति की सिफारिशें खोलकर बैठ जाती है, जबकि देश में एक बड़े वर्ग का मानना यह भी है कि सच्चर समिति की सिफारिशें देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के अनुकूल बिलकुल नहीं हैं। हम नहीं कह सकते कि यह धारणा सही है या गलत, पर शुक्रवार को केंद्र ने राज्यों को जिस एक सिफारिश को लागू करने के लिए पत्र लिखा है, उस सिफारिश को सही नहीं माना जा सकता।

केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों के प्रमुख सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि वे सच्चर समिति की सिफारिशों के अनुरूप मुस्लिम बहुल इलाकों के थानों में कम से कम एक मुस्लिम इंस्पेक्टर या सब-इंस्पेक्टर की नियुक्ति जरूर करें, ताकि मुस्लिमों का भरोसा जीता जा सके। यहां दो चुभते हुए सवाल पैदा होते हैं? एक-क्या पुलिस को सांप्रदायिक नजरिए से देखना उचित है? यदि है, तो क्या आगे मुस्लिम न्यायाधीश, मुस्लिम प्रशासनिक अधिकारी आदि की मांग नहीं उठेगी? दूसरा सवाल, क्या मुस्लिम भारतीय शासन-प्रशासन और भारतीयता पर भरोसा नहीं करते हैं? यदि करते हैं, तो चिट्ठी या फिर सच्चर समिति की सिफारिशों में मुस्लिमों का भरोसा जीतने की बात क्यों कही गई है? जरूरत इस बात की है कि सरकार से इन सवालों के जवाब मांगे ही जाएं।

Post Comments
More News
 सम्पर्क करें  विज्ञापन दरें आपके सुझाव संस्थान
© Copyright of Rajexpess 2009,all right reserved.
Developed & Designed By: