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तीन माह में तीन कार्यवाही तक सीमित
On 6/15/2012 8:28:20 PM

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जबलपुर। वाणिज्यिक कर विभाग में इन दिनों जहां स्थानांतरण का दौर चल रहा है, वहीं अधिकारियों की उदासीनता या कहें कि राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते औचक निरीक्षण से लेकर छापा कार्यवाही तक के काम लगभग ठप पड़े हैं। स्थिति यह है कि वित्तीय वर्ष 2012-13 की पहल तिमाही गुजरने को है, लेकिन अब तक विभागीय अमले ने सिर्फ 3 स्थानों पर छापा कार्यवाही की है, वहीं पैनाल्टी वसूली का आंकड़ा 4 करोड़ रुपए के करीब है, जबकि इस वक्त तक यहा आंकड़ा इसे तीन से चार गुना अधिक होना चाहिए था।। खास बात यह है कि वाणिज्यिक कर की टीम को मुख्यालय से लेकर अधिकारियों तक के द्वारा जांच के दौरान नरम रुख अपनाने और सख्ती न करने के मौखिक आदेश दिये जा रहे हैं।गौरतलब है कि इन दिनों वाणिज्यिक कर की टीम को इंदौर स्थित मुख्यालय से काम करने की स्वतंत्रता न मिल पाने की वजह से जहां विभागीय अमला असहाय महसूस कर रहा है, वहीं शासकीय राजस्व को भी भारी नुकसान हो रहा है। सूत्रों की माने तो हालात यह है कि बीते दो माह से उन्हें किसी भी प्रकार की कार्यवाही न करने के आदेश है। यदि अधिकारियों की टीम जांच के लिए निकलती भी है तो उन्हें उपायुक्त स्तर के अधिकारियों से अनुमति लेनी होती है, जबकि नियमानुसार जांच पर निकले सीटीओ को पैनाल्टी वसूली करने के अधिकार प्राप्त होते हैं।

 

अब व्यापारियों की रहेगी चांदी

वाणिज्यिक कर अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि एक तरफ मुख्यालय से संभागीय कार्यालय को टारगेट दिये जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ कर चोरी कर रहे व्यापारियों के खिलाफ कार्यवाही न करने के मौखिक आदेश प्रदेश के बड़े नेता देते हैं। मुख्यालय में बैठे अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि यदि खुलकर बोले तो अब आगामी विधानसभा चुनाव तक व्यापारियों की चांदी होगी और वाणिज्यिक कर विभाग की तरफ से कोई बड़ी कार्यवाही किये जाने की संभावना कम होगी, जिसकी वजह व्यापारियों और राजनेताओं के बीच की सैटिंग है।

छापा मारने के पूर्व चाहिए एश्योरेंस

अधिकारियों की माने तो वे संभागीय स्तर किसी भी व्यापारी के खिलाफ छापा कार्यवाही करने प्रस्ताव भेजते हैं तो उनसे इस बात का स्पष्ट एश्योरेंस मांगा जाता है कि यदि पैनाल्टी एक करोड़ की होती है तब तो ठीक है वर्ना अनुमति मिलना मुश्किल होता है। अधिकारी बताते है कि कोई भी छापा कार्यवाही दस्तावेजों और शक के आधार पर की जाती है। ऐसे में पहले से किसी भी आंकड़े पर एश्योर कर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता है।

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