जबलपुर। वानिकी पाठय़क्रम में अध्ययनरत छात्र चार वर्षीय डिग्री कोर्स में 50 विषयों की पढ़ाई करते हैं, इसके बावजूद उन्हें रोजगार का आश्वासन नहीं है। वन संबंधी तकनीकि पहलूओं में विशेष योग्यता वाले इन छात्रों को वन संरक्षक का पद भी नसीब नहीं होता। इनके विषय अभी तक राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा में भी शामिल नहीं किए गए हंै। केंद्र सरकार के स्पष्ट दिशा-निर्देश एवं राष्ट्रीय वन नीति में हुए प्रावधानों को भी राज्य सरकार नजर अंदाज कर रही है।
जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में वानिकी पाठय़क्रम की शुरुआत वर्ष 1987 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली की अनुशंसा पर हुई। वानिकी के स्नातक पाठय़क्रम में 50 विषय शामिल किए गए हैं, लेकिन कड़ी मेहनत के बाद भी डिग्री धारियों को रोजगार नहीं मिलता। जबकि विवि अध्ययन के लिए मोटी रकम लेता है।
राष्ट्रीय वन नीति 1988 में उल्लेख: वन भूमि एवं उसके उत्पादों को संरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय वन नीति 1988 क्रं. 3-1/8ई/एफ/पी के 4.11 कालम में वानिकी शिक्षा के संबंध में कहा गया है कि भारतीय वन सेवाआंे में नियुक्ति के समय वानिकी विषय संबंधित शैक्षणिक एवं व्यवसायिक योग्यताओं को ध्यान में रख कर वानिकी विषय विशेषज्ञों को इन सेवाओं में विशिष्ट प्राथमिकता दी जानी चाहिए। लेकिन इस नीति का पालन मप्र में नहीं हो रहा है। छात्रों को वन संरक्षक पद पर भी आरक्षण हासिल नहीं है।
विभिन्न प्रदेशों में लागू
राष्ट्रीय वन नीति को अन्य राज्यों जैसे केरल, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडू, जम्मू कश्मीर, बिहार, झारखण्ड आदि राज्य लागू कर चुके हैं। इन राज्यों की राज्य वन सेवाओं के पद वन क्षेत्रपाल एवं वन संरक्षक के पदों पर वानिकी स्नातकों के लिए 25 से लेकर सौ फीसदी तक आरक्षण है। लेकिन प्रदेश में ऐसा कुछ भी नहीं है।
वन सेवाएं सभी के लिए क्यों
वानिकी पाठय़क्रम में अध्ययनरत छात्र प्रदीप पटेल, प्रीति सिंह ठाकुर, मोनिका रघुवंशी एवं नेहा चौधरी ने बताया कि अभियांत्रिकी सेवाएं केवल अभियांत्रिकी छात्रों के लिए, चिकित्सा सेवाएं एमबीबीएस छात्रों के लिए, कृषि सेवाएं कृषि छात्रों के लिए, विधि सेवाएं विधि छात्रों के लिए होती हैं, तो वन सेवाएं सभी संकाय के छात्रों के लिए क्यों है?। केंद्र सरकार का सभी राज्य सरकारों का स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं कि वन सेवा में वानिकी छात्रों को विशिष्ट प्राथमिकता दी जाए, इसका पालन अभी तक नहीं हुआ
इनका कहना
सभी राज्यों में राष्ट्रीय वन नीति एवं केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए वानिकी विषयक छात्रों को आरक्षण दिया गया है। लेकिन मप्र राज्य सरकार इसे लागू नहीं कर रही है। चार साल में छात्रों को 50 विषय पढ़ने होते हंैं, लेकिन अभी तक इस विषय को एमपीपीएससी में भी शामिल नहीं किया गया है। हम मांग करते हैं कि वानिकी छात्रों को वन सेवा में आरक्षण दिया जाए।
पंचम सनोढिया, अध्यक्ष, वानिकी छात्र कल्याण संघ, कृषि विवि