जबलपुर । पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (वेटरनरी यूनिवर्सिटी) में राज्य शासन की ओर से कुलसचिव पद का प्रभार देकर भेजे गए डॉ. केपी मिश्रा की नियुक्ति पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए हैं। कुलसचिव की नियुक्ति में मप्र विश्वविद्यालय अधिनियम 2009 की धारा 14 (1)(2) (क) एवं (ख) को ताक पर रखने के आरोप सामने आ रहे हैं क्योंकि नियुक्त किए गए कुलसचिव मात्र स्नातक हैं जबकि इसी यूनिवर्सिटी में सहायक कुलसचिव मास्टर डिग्रीधारी हैं।
वेटरनरी यूनिवर्सिटी में कुलसचिव के प्रभार पर तैनात डॉ. मिश्रा पशुचिकित्सा सहायक शल्यज्ञ (बी.व्हीएससी) हैं। सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ. मिश्रा तत्कालीन परियोजना अधिकारी जिला सीधी में 1994 तक प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ रहे। इस दौरान जवाहर रोजगार योजना अतंर्गत की गई अनियमितता के लिए डॉ. मिश्रा को निलंबित कर दिया गया था। बाद में 19 मार्च 2012 को दोषमुक्त होने के उपरांत इन्हें उपसंचालक (वेतनमान 15600-39100-6600) पशुचिकित्सा सेवाएं के पद पर पदोन्नत कर रजिस्टार मप्र पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर में पदस्थ किया गया
नियुक्ति में नियम ताक पर
वेटरनरी यूनिवर्सिटी अधिनियम के विरूद्ध है क्योंकि उपसंचालक का वेतनमान एंव पद सह प्राध्यापक के वेतनमान (37400-6700-8000) से भी कम है एवं पद भी निम्न है। जानकारी के मुताबिक उक्त पदोन्नति आदेश पर डॉ. मिश्रा को पहले तीन पदोन्नतियां दी गईं। सूत्र यहां तक बता रहे हैं कि कुलसचिव डॉ. मिश्रा को उक्त लाभ कुलपति डॉ. जीपी मिश्रा के रिश्तेदार होने के कारण दिया गया है। उक्त मामले की शिकायतें राज्यशासन सहित प्रमण्डल को भी भेजी गईं हैं। इस सम्बंध में जब कुलसचिव डॉ. मिश्रा से सम्पर्क करने की कोशिश की गई तो उनसे सम्पर्क नहीं हो सका।