भोपाल। राजधानी के समीपस्थ घोड़ापछाड़ और सांकल डेम में जल भंडारण का प्रमुख स्त्रोत अजनाल नदी अब खुद को भी सलामत रखने में नाकाम साबित हो रही है। दरअसल नदी तट पर जगह-जगह हुए अतिक्रमण और विभिन्न क्षेत्रों से आई गंदगी के चलते इसकी सांसें थमने लगी हैं। फलस्वरूप जहां क्षेत्र के लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों में सिंचाई और पेयजल का संकट गहराने लगा है, वहीं प्रदूषित पानी पीने से मवेशियों में भी बीमारी की शिकायतें मिल रही हैं। लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र की जीवनदायिनी अजनाल नदी के व्यवस्थित रख-रखाव पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह दिन दूर नहीं जब इसका अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।
नदी में आ रही भेल की गंदगी
उधर भेल टाउनशिप सहित खजूरी कलां, पिपलानी, रत्नागिरी, सोनागिरी और आनंदनगर क्षेत्र का समूचा गंदा पानी खजूरी नाले में बहकर सीधे अजनाल नदी में मिल रहा है। स्थिति यह है कि कभी पेयजल के रूप में उपयोग किया जाने वाला अजनाल का पानी अब प्रदूषण के चलते जहरीला हो गया, जिसे मवेशी को भी नहीं पिलाया जा सकता। यह विडंबना ही है कि सांकल डेम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने वाला भेल प्रबंधन भी इस दिशा में अब उदासीनता बरत रहा है।
जिंदा हैं दो डेम
कान्हासैया से लगे ग्राम झिरियाखेड़ा में घोड़ापछाड़ और नरोन्हा सांकल स्थित सांकल डेम दोनों ही अजनाल नदी के पानी से जिंदा हैं। इतना ही नहीं दोनों जलाशयों के बीच लगभग 14 किमी क्षेत्र में पड़ने वाले ग्राम झिरियाखेड़ा, छावनी, आदमपुर छावनी नाका, खजूरी खुर्द, डोबरा जागीर, सागोनी कलां, सागोनी चोर, कोलुआ खुर्द, लालपुरा, टांडा, सांकल, गुदावल, जुमनियां कलां तथा कंकाली मंदिर के आसपास 18 गांवों के हजारों किसानों की जमीनों की प्यास भी इसी नदी के जल से बुझती आई है। मगर अब हालात विपरीत हो रहे हैं। जिला अंत्योदय समिति के ब्लॉक अध्यक्ष रामचरण गौर तो यहां तक कहते हैं कि विभागीय अधिकारियों की उदासीनता अजनाल नदी के लिए अभिशाप बन गई, वरना हजारों किसानों की जीवनदायिनी अजनाल खुद प्यासी न रहती।
आम रास्ते पर कब्जा
अजनाल के बीच होते रायसेन रोड से डोबरा जागीर जाने वाले पर निजी उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा कब्जा कर आम रास्ता ही बंद कर दिया गया। कोलुआ खुर्द की सरपंच अनारबाई बताती हैं कि एलएनसीटी कॉलेज परिसर से गुजरने वाले इस रास्ते को प्रबंधन ने पूरी तरह बंद करके वहां सीवेज लाइन बिछा दी, जिसकी गंदगी को नदी में छोड़ा जा रहा है। इसी तरह ग्रामीण हेमराज, छुटका, रमेश, रतन, जवाहरसिंह और सुंदरलाल आदि ने बताया कि यहां से एक कच्च रास्ता ग्राम डोबरा जागीर को जाता था। उन्होंने कहा कि लगभग 50 वर्ष पुराने इस रास्ते को कॉलेज वालों ने बंद कर दिया है। फलस्वरूप अब नदी पार करने के लिए लोहे का छोटा पुल ही एकमात्र साधन बचा है। इसी तरह पुल के दूसरी ओर भी कुछ ग्रामीणों ने अवैध कब्जा कर लिया, जिससे रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।
अतिक्रमण की चपेट में नदी
नदी की सफाई की बात तो दूर इस पर जगह-जगह लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया, जिससे नदी का पानी अधबीच में ही अटक जाता है। जमुनियां कलां के ग्रामीण चम्पालाल मीना पटेल, मुकेश मीना, नर्बदाप्रसाद साहू, मूलचंद मीना, जमनाप्रसाद पाटीदार,ओमप्रकाश, जगमोहन, भारत सिंह, गुलाब सिंह और रामफूल आदि ने बताया कि रायसेन रोड से जमुनियां तक करीब एक दर्जन से अधिक स्थानों पर नदी के बीच लोगों ने मेढ़ डालकर अथवा छोटे बांध बनाकर कब्जा कर लिया है, जिससे बारिश खत्म होते ही नदी का पानी जगह-जगह रुक जाता है। फलस्वरूप सांकल डेम पर पर्यटन स्थल की रौनक समाप्त होने के कगार पर है। इधर सफाई के अभाव में नदी के बीच बड़ी- बड़ी झाड़ियां पनपने से जलप्रवाह बंद हो गया है।