भोपाल। शहर में रोजाना दो लाख 80 हजार लीटर दूध का विक्रय करने वाले भोपाल दुग्ध महासंघ में शुक्रवार को लगभग सवा लाख लीटर दूध कम आया। आश्चर्य वाली बात यह है कि संघ ने लगभग आधी आमद के बावजूद शहरवासियों को दूध की सप्लाई नियमित रूप से बरकरार रखी। हालांकि संघ अधिकारियों को इस व्यवस्था में पसीना आ गया।
उनका कहना है कि समितियों और दुग्ध उत्पादकों के तेवर देखते हुए इंदौर तथा उज्जैन दुग्ध संघ से दूध मंगाया गया था। संघ के कार्यपालन अधिकारी एसके सिंह गौर ने कहा कि दूध के मानकों में परिवर्तन के कारण दुग्ध समितियों से काफी कम मात्र में दूध प्राप्त हुआ, जिससे शहर में दूध की कमी होना स्वाभाविक थी। बावजूद इसके हमने इधर-उधर से दूध मंगाकर सप्लाई व्यवस्थित रखी और शहरवासियों को दूध की किल्लत नहीं आने दी।
क्या है रोष का कारण : दुग्ध संघ में पिछले करीब 30 साल से दूध के जो मानक तय थे, उनमें अचानक फेरबदल किए जाने से उत्पादकों और संभाग की 1250 दुग्ध समितियों ने गुरुवार से संघ को दूध देना बंद कर दिया है। उनका आरोप है कि संघ के वरिष्ठ अधिकारियों की हठधर्मिता के चलते 30 साल पुराने नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। दूध विक्रेताओं के अनुसार समितियों में दूध खरीदी मूल्य की जो लिस्ट लगी है, वह 18 से 20 रुपए प्रति लीटर की है, लेकिन अधिकारियों ने मानकों में फेरबदल कर उसे पांच से 10 रुपए प्रतिलीटर पर ला दिया। ऐसे में दूध उत्पादकों के सामने जीवन यापन का संकट खड़ा हो गया है।
ऐसे तय हुए मूल्य : दुग्ध संघ द्वारा 30 साल पहले दूध क्रय करने के लिए जो मानक तय किये थे, उन्हें एक जून से बदल दिया गया है। नए नियमों के अनुसार प्रत्येक बर्तन से सेम्पल के तौर पर 100 मिली दूध लिया जाता है। इसका फैट टेस्ट कर दूध को लेक्टोमीटर से जांचकर सीएलआर निकाला जाता है। फैट की मात्र और लेक्टोमीटर रीडिंग एसएनएफ के आधार पर मूल्य तय किया जाता है।
8.5 प्रतिशत फैट जरूरी, नहीं: संघ अध्यक्ष सुभाष मांडगे ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2011 में जो दूध को लेकर जो नए नियम जारी किए हुए हैं। उसमें फैट की मात्र 8.5 प्रतिशत होना अनिवार्य था। यदि दूध देने वाली समितियां इससे कम फैट का दूध उपलब्ध कराती है, तो पहले तो दुग्ध संघ स्वयं इसके फैट की जांच करेगा।
दो दिन नहीं आएगा पानी
भोपाल। कोलार परियोजना की मुख्य ग्रेविटी एवं फीडर मेन पाइप लाइन में आवश्यक सुधार कार्य जारी है। इस कारण शनिवार व रविवार को राजधानी के लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र में जलप्रदाय प्रभावित होगा। गौरतलब है कि 1500 एमएम व्यास की कोलार ग्रेविटी मेन पाइप लाइन में लीकेज हो जाने से हजारों गैलन पानी बर्बाद हो रहा है। लीकेज को बंद करने और पाइप लाइन की मरम्मत करने के लिए ननि प्रशासन ने यह कदम उठाया है। इस दौरान जहांगीराबाद, बाग दिलकुशा, अशोका गार्डन, लाला लाजपतराय कॉलोनी, अरेरा हिल्स, प्रेस कॉम्प्लेक्स, रिजर्व बैंक कॉलोनी आदि क्षेत्रों में शनिवार को जलप्रदाय प्रभावित रहेगा।
इसी तरह रविवार को काजीकैंप, शाहजहांनाबाद, पुतलघर, सोनागिरी, इंद्रपुरी, गुलमोहर, अशोका गार्डन, आरिफ नगर, भोपाल मेमोरियल अस्पताल, चांदबड़, नेहरू नगर, कोटरा सुल्तानाबाद, मुकद्दस नगर, मोमनपुरा, जिंसी, विकास, न्यू सुभाषनगर, अफजल कॉलोनी, सोनिया कॉलोनी, त्रिलंगा, ई-7 एक्सटेंशन, सुदामा नगर, 228 क्वाटर्स, सरस्वती नगर, ई-1 से ई-6 अरेरा कॉलोनी, 1100 क्वाटर्स, नारायण नगर, सुरेंद्र पैलेस, हबीबगंज रेलवे स्टेशन, रेलवे कॉलोनी, गौतम नगर, रचना नगर, कस्तूरबा नगर, चार इमली, शिवाजी नगर, पंचशील नगर, सुभाष नगर, पंजाबी बाग, नारियलखेड़ा, पीजीबीटी कॉलेज आदि क्षेत्रों में जलसंकट रहेगा।