भोपाल। राजधानी के एमपी नगर स्थित अर्पण ब्लड बैंक पर उस समय हड़कंप मच गया, जब वहां फूड एंड ड्रग विभाग के ड्रग इंस्पेक्टरों ने छापामार कार्रवाई की। इस कार्रवाई के दौरान ब्लड बैंक में न तो ब्लड एजीटेटर मिला और न ही डाइइलेक्ट्रिक ट्यूब सीलर मौजूद था। जांच में खास बात यह भी पाई गई कि यहां रखे ब्लड के स्टाक में भी रिकार्ड के अनुसार अंतर पाया गया, जिसके चलते रिकार्ड भी जप्त कर लिया गया है। यहां यह बता दें कि यह दोनों ही उपकरण किसी रक्तदाता से रक्त लेने से पहले उसके रक्त की जांच में काम आते हैं।
ड्रग इंस्पेक्टर हेमंत श्रीवास्तव ने बताया कि अर्पण ब्लड बैंक की शिकायतें प्राप्त हो रही थी। इसके चलते रात्रि साढ़े आठ बजे कार्रवाई की गई। इस दौरान यहां पर ब्लड एजीटेटर, डाई इलेक्ट्रिक टय़ूब सीलर सहित ब्लड एजीटेटर का थमोग्राफ नहीं पाया गया। उन्हाेंने बताया कि जो उपकरण मिले, वह पूरी तरह खराब व एक्सपायरी थे। इसमें रेफ्रीजरेटर बंद पाया गया। इसके अतिरिक्त रिकार्ड में भी खासी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं।
बेचते थे 850 रुपए का ब्लड 1100 रुपए में
श्री श्रीवास्तव ने बताया कि जब रिकार्ड की जांच की गई तो पाया गया कि अर्पण ब्लड बैंक में ब्लड की एक यूनिट के 850 रुपए के एवज में 1100 रुपए लिए जा रहे थे। जब इसकी पड़ताल की गई तो वहां के डॉक्टरों ने निरीक्षकों को बताया कि 850 रुपए के अतिरिक्त ली जाने वाली राशि को वापस कर दिया जाता है। डॉक्टरों का यह जवाब जांच के दौरान गलत पाया गया।
जमकर चल रही है ब्लड की सौदेबाजी
शहर के कई निजी ब्लड बैंकों में रक्त की सौदेबाजी चल रही है। यह तो एक मात्र उदाहरण है। बल्कि अन्य ब्लड बैंकों में भी यही काला कारोबार जारी है। रक्त विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड की 300 एमएल की एक थैली 850 रुपए में मिलती है। किसी रक्तदाता का जब रक्त लिया जाता है तो पांच सौ रुपए केवल इसलिए जमा कराए जाते हैं, ताकि उसके लिए रक्त की पूरी जांच की जा सके और मरीज को रक्त के पांच तत्वों में से जो चाहिए वह उसे दिया जा सके। यह प्रक्रिया कम्पोनेंट प्रक्रिया कहलाती है, लेकिन ब्लड को कंपोनेट करने की प्रक्रिया हमीदिया व बीएमएचआरसी में हैं। इन निजी ब्लड बैंकों में ब्लड को कंपोनेट करने के नाम पर मरीजों के परिजनों को लूटा जाता है।
बैठक में निजी ब्लड बैंकों को लगाई फटकार
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के इदगाह हिल्स स्थित मुख्य कार्यालय में कार्रवाई से पूर्व निजी व सरकारी ब्लड बैंक के संचालकों की बैठक भी हुई। बैठक में निजी ब्लड बैंकों द्वारा सुरक्षा के ध्यान न रखे जाने तथा अन्य उपकरण न होने के चलते उन्हें खासी फटकार लगाई गई और व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए।