भोपाल। सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस पांच सितंबर को मिलने वाले शिक्षक पुरस्कार अब पहुंच से दूर होंगे। जो गाइडलाइन बनाई जा रही है, उसके तहत अब कार्य परिणाम के आधार पर ही शिक्षक पुरस्कार से नवाजे जाएंगे। मिडल-प्रायमरी में पढ़ाने वाले शिक्षकों को प्रतिभा पर्व में उत्कृष्टता का पैमाना ही सम्मानित करा सकता है।
पांच सितंबर को देश के प्रथम राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन की जन्मतिथि को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन अच्छा कार्य करने वाले शिक्षकों को राज्य और राष्ट्र स्तरीय पुरस्कार से नवाजा जाता रहा है। अभी तक पुरस्कार के लिए आवेदन जिला स्तर से जनप्रतिनिधियों की ताबड़तोड़ अनुशंसाओं पर विभाग मुख्यालय आते रहे हैं। राज्य स्तर पर भी अधिकारियों की कृपा और मंत्रियों के दबाव के कारण शिक्षकों का पुरस्कारों के लिए चयन होता रहा है। इस व्यवस्था में सीधे तौर पर बदलाव का दावा किया गया है। राज्य शिक्षा केंद्र ने जो गाइडलाइन तय की है, उसके तहत कार्य परिणाम अच्छा होगा, वही सम्मान का पात्र होगा, इसमें अब क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और प्रभावशालियों की कोई भूमिका नहीं होगी।
नहीं हुआ अमल
वर्ष 2005 में लोक शिक्षण संचालनालय ने जो नीति बनाई थी, उस पर कोई अमल नहीं किया गया है। न तो ऑनलाइन और न ही ऑफलाइन आवेदन का प्रावधान था। उस समय डीपीआई ने सभी डीईओ को चिट्ठी लिखी थी। इसमें स्पष्ट था कि शिक्षकों का सेवा अभिलेख चेक करके उसे पुरस्कार देने के लिए दस्तावेज राज्य मुख्यालय भेजा जाए। उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षक को तब तक कोई पता न चले जब तक उसका नाम पुरस्कार के लिए चयनित न हो जाए। इस नीति पर जिम्मेदारों ने कभी अमल नहीं किया। इसी का परिणाम रहा कि कार्य से दगाबाजी करने वाले पुरस्कार पाते रहे और मेहनत करने वाले शिक्षक इस हक से दूर रहे।
यह होगा आधार
विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रतिभा पर्व के अंतर्गत आयोजित द्वितीय बाह्य मूल्यांकन के आधार पर ए और बी ग्रेड प्राप्त कक्षा के शिक्षक ही किसी भी स्तर के पुरस्कार प्राप्त करने के हकदार होंगे। अगर इससे बाहर कक्षा का सी, डी या फिर ई ग्रेड आया है, तो पुरस्कार के लिए शिक्षक आवेदन भी नहीं कर सकता। आवेदन करेगा भी तो उसे मान्य नहीं किया जाएगा। व्यवस्था तो यहां तक बनाई गई है कि जो शालाएं प्रतिभा पर्व में डी और ई ग्रेड लेकर आई, हैं वहां कक्षा शिक्षक पर कार्रवाई की जाएगी।