भोपाल। मदीना रूबात में भोपाल मूल का नाजिर बनाने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। शहरवासियों का कहना है कि नवाब मंसूर अली खां की पत्नी और मशहूर अदाकारा शर्मिला टैगोर ने तीन माह में मामले को सुलझा कर भोपाल मूल का नाजिर बनाने का वादा किया था, लेकिन बेगम अपने वादे से मुकर गइर्ं। उन्होंने सियासी दांव-पेंच खेलकर अपनी बेटी और शाही औकाफ की मुतावल्ली सबा अली को नाजिर बनाने का ढोंग कर सऊदी मूल के अब्दुल करीम को मुख्तारनामा देकर नाजिर का काम सौंप दिया। जबकि वह भोपाल प्रवास के दौरान शहर के पार्षदों व गणमान्य नागरिकों से वादा कर के गईं थीं कि तीन माह में वैसा ही होगा जैसी वाकिफ व भोपाल के लोगों की मंशा है।
शाही औकाफ की साजिश : मप्र मुस्लिम परिषद ने आरोप लगाया है कि पहले भोपाल के मुसलमानों से शाही औकाफ साजिश कर रूबात को सऊदी मूल के नाजिर के हवाले कर धोखा कर रहा है। परिषद ने कहा कि बेगम ने भोपालवासियों से किए गए वायदे से मुकरते हुए दिखाने के लिए सबा को नाजिर बनाकर पॉवर ऑफ एटर्नी (मुख्तारनामा) देकर सऊदी मूल के शख्स को नाजिर बनाना दिया। शाही औकाफ के सचिव का इस्तीफा देने के बाद भी नहीं हटाया गया।