ग्वालियर। मप्र सरकार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक पालतू पशुओं को छोड़कर अन्य पशुओं को रिहायशी क्षेत्र में नहीं रखा जा सकता। मप्र उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने भी अपने आदेश में एजी ऑफि स पुल के नीचे चल रहे एनीमल क्योर एण्ड केयर सेंटर को हटाने को कहा था। इसके बावजूद इसके संचालन से निकटवर्ती क्षेत्र में रहने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बताया तो यह भी जा रहा है कि जिस स्थान पर यह सेंटर संचालित है, वह जमीन भी संबंधित संस्था को आवंटित नहीं है।
एनीमल क्योर एण्ड केयर सेंटर का संचालन शहर के आवारा कुत्ताें को पकड़कर बधियाकरण करने के बाद शहर से बाहर छोड़ने के लिए किया जा रहा है। लेकिन संस्था द्वारा कुत्ताें को खुले में छोड़ने से रिहायशी क्षेत्र का वातावरण दूषित हो रहा है। इस संबंध में उच्च न्यायालय में महेंद्र कुमार सक्सैना एवं अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद एकल पीठ ने 6 मई 2010 को एक माह में नगर निगम सीमा से बाहर ले जाने के आदेश दिए थे। बाद में युगलपीठ ने भी 27 अगस्त 2010 को इस केंद्र को शहर से बाहर ले जाने का आदेश दिया था।
मिल रहे लाखों रुपए
सेंटर चलाने वाली संस्था एनीमल क्योर एण्ड केयर को एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया से लाखों रुपए मिल रहे हैं। उच्च न्यायालय में दायर याचिका के जवाब में संस्था की ओर से 3400 कुत्ताें के लिए करीब 42 लाख रुपए मिलने की बात स्वीकारी गई थी।
फिर भी खत्म नहीं हो रहे आवारा कुत्ते
संस्था द्वारा कुत्ताें के प्रजनन पर रोक लगाने के लिए ऑपरेशन किए जाने के बाद भी शहर से आवारा कुत्ते समाप्त नहीं हो रहे हैं।
इनका कहना है
एनीमल क्योर एण्ड केयर सेंटर का मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस संबंध में कुछ भी कहना उचित नहीं है।
श्रीमती अलका गुप्ता, चेयरमेन