नई दिल्ली । क्या आतंकवाद में शामिल ‘जेहादी’ खुदगर्ज हो गए हैं? क्या वे अपनी जेबें भर रहे हैं? ये सवाल आतंकी घटनाओं की जांच के दौरान उठे हैं। कई बम धमाकों की जांच में यह बात सामने आई है कि इंडियन मुजाहिदीन के जमीनी कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि उसके शीर्ष नेतृत्व के लोग भी विदेशों से आ रहे फंड का इस्तेमाल खुद की अय्याशी के लिए कर रहे हैं। आतंकी घटनाओं को अंजाम देने और नए लोगों को जोड़ने के लिए मिल रहे पैसे के निजी इस्तेमाल का मामला तब सामने आया जब 8 जून को कत्ल किए गए पुणो के यरवदा जेल में बंद कतील सिद्दिकी से एटीएस के जांचकर्ताओं ने पूछा कि उसने आईएम में नए लोगों की भर्ती के लिए मिले 1 लाख रुपए कहां खर्च किए? पहले तो उसने कुछ भी बताने से इनकार किया। लेकिन कड़ाई से पूछे जाने पर उसने बताया था कि उसने इन पैसों को दो लड़कियों पर खर्च किया है। उसने यह भी बताया था कि उसकी आईएम की विचारधारा में कोई दिलचस्पी नहीं है। बल्कि उसकी दिलचस्पी फंड का खुद पर इस्तेमाल में है।
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