नई दिल्ली । अमेरिका से 99 जेट इंजनों की आपूर्ति के लिए 600 मिलियन डॉलर (करीब 3300 करोड़ रुपए) के सौदे पर बातचीत अंतिम चरण में है। ये इंजन डीआरडीओ द्वारा विकसित हल्के लड़ाकू विमान तेजस में इस्तेमाल किए जाने हैं। दो साल पहले भारत ने एलसीए मार्क-2 कार्यक्रम के लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक को उसकी प्रतिद्वंद्वी यूरोपियन यूरोजेट-2000 पर प्राथमिकता दी थी।
एलसीए के दूसरे चरण के प्रयोग चल रहे हैं और इसके 2014-15 तक पूरा होने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक मूल्य और तकनीक हस्तांतरण समेत तमाम मुद्दों पर अमेरिकी कंपनी से वार्ता लगभग पूरी हो गई है। उम्मीद है कि एलसीए मार्क-2 विमान में फिट किए जाने वाले इन इंजनों की आपूर्ति को लेकर जल्द ही समझौते पर हस्ताक्षर भी हो जाएंगे।
फिलहाल 99 इंजनों का ऑर्डर देगा भारत
समझौते के मुताबिक फिलहाल भारत 99 इंजनों का आर्डर देगा, लेकिन उसके पास भविष्य में 100 अतिरिक्त इंजनों के आर्डर का विकल्प भी रहेगा। एलसीए की पहली खेप में फिट जीई एफ-404 की तुलना में एलसीए मार्क-2 के लिए जीई एफ-414 इंजन का इस्तेमाल होगा। प्रयोगात्मक उड़ान के दौरान वायुसेना को महसूस हुआ कि मौजूदा इंजन जीई एफ-404 तेजस को उतनी ताकत नहीं दे पा रहा, जिसकी जरूरत है। लिहाजा डीआरडीओ ने वायुसेना की जरूरतों के मुताबिक एलसीए मार्क 2 कार्यक्रम शुरू किया।