इंदौर। हादसे के बाद इन घायलों की मदद करने के लिए एमवाय की सिक्युरिटी गार्ड टीम ने भी जबरदस्त योगदान दिया। इस टीम ने कई लोगों का जीवन बचाया और रेत में निकालकर उन्हें एमवाय पहुंचाया। एमवाय में सिक्युरिटी गार्ड का काम करने वाली टीम के सदस्य कृष्ण कुमार तिवारी, अवधेश शुक्ला, परमवीर कौरव, कमलेश यादव,के एस शुक्ला भी सोमवार को ट्वेरा में सवार होकर ओंकारेश्वर गए थे। ये टीम जब वहां से लौट रही थी उसी दौरान इन लोगों ने बाईगांव के पास ये दृश्य देखा। उसके बाद तो ये लोग सबकुछ भूलकर गाड़ी साइड में खड़ी कर बचाव में जुट गए। सिक्युरिटी फोर्स के होने और एमवाय से जुड़े होने के कारण कई मरीजों को इन लोगों ने टेकनिक से निकाला और उनकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कैसे हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रेत से भरी ट्रैक्टर ट्राली बाईगांव में शनि मंदिर के पास से गुजर रही थी। उसी दौरान ट्राली पलटी खा गई। ट्रैक्टर ड्राइवर के भी समझ में नहीं आया कि क्या हुआ। ट्राली पलटते ही वहां पर चीख पुकार शुरु हो गई। कुछ ही देर में गांव के लोग मदद के लिए वहां पहुंचे। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर मदद की कोशिश की और पुलिस को भी खबर दी गई। हादसा होते ही महिलाएं रेती और ट्राली के नीचे दब गई। वहां चीख पुकार मच गई। इसकी खबर गांव में फैलते ही गांव वाले वहां मदद के लिए पहुंचे। इन लोगों ने जैसे तैसे महिलाओं को ट्राली के नीचे से निकाला। कई महिलाएं बेसुध थी तो कई महिलाएं लहूलुहान पड़ी हुईं थी। इस दौरान वहां से गुजरने वाले कुछ अन्य लोग भी मदद के लिए रुक गए थे। कुछ महिलाएं तो अपने अन्य परिजनों के साथ भी ट्राली में सवार थीं। ये जब बाहर निकलीं तो कुछ किशोरियां लहूलुहान होने के बाद भी यही सवाल कर रहीं थीं कि मेरी मां कहां है.? कोई पूछ रहा था मेरी बहन कहां है.? कोई पूछ रहा था कि मेरी बेटी कहां है। वहां चीख पुकार के बीच लोगों को कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि वे क्या जवाब दें।
खंडवा-इंदौर रूट पर ट्रैफिक जाम
हादसे के बाद खंडवा-इंदौर रुट पर ट्रैफिक जाम हो गया। बचाव काम चलने के कारण वाहनों का आना जाना बंद हो गया। इसके बाद तो दोनों तरफ वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगने लगी। वाहनों के कारण ट्रैफिक जाम हो गया। पुलिस भी वहां पहुंची लेकिन जाम नहीं खुल सका। घायलों को ले जाने में भी काफी दिक्कतें आईं। करीब एक घंटे तक खंडवा-इंदौर मार्ग बंद रहा। मार्ग पर दूर-दूर तक वाहनों की कतारें लगी हुई थीं।
जो वाहन मिला उसमें भेजा घायलों को
हादसे में दो दर्जन से ज्यादा महिलाएं घायल हो गईं थी। इसमें बुजुर्ग महिला से लेकर छोटी बच्चियां भी थीं। वहां रोते -बिलखते इन घायलों को जो वाहन उपलब्ध हुआ उससे एमवाय के लिए रवाना किया गया। एम्बुलेंस के अलावा पुलिस की गाड़ी, टाटा मैजिक आदि से भी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।
घायलों को पहुंचाने में भी दिक्कतें
ट्रैफिक जाम होने के कारण वाहनों का आना जाना लगभग बंद हो गया था। गांव में ही और घटना स्थल के आसपास से ही जो वाहन मिला उसमें घायलों को अस्पताल के लिए रवाना किया गया। जाम होने के कारण इन वाहनों को भी एमवाय अस्पताल पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जाम में फंसे लोगों ने भी जब घायलों की हालत देखी तो उन्होंने खुद ही ट्रैफिक जाम में से इन वाहनों को निकलवाया और अस्पताल के लिए रवाना किया। देर रात तक एमवाय में घायलों का इलाज चल रहा था। उस दौरान कोई भी डाक्टर उनसे नाम नहीं पूछ रहा था वे तो केवल इलाज में जुटे थे। गांव के लोगों को खबर मिलने के बाद वे भी एमवाय अस्पताल पहुंच गए थे।