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डेढ़ माह के शिशुओं की भी हो सकेगी एचआईवी जांच
On 7/22/2012 7:03:59 PM

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भोपाल। नवजात से लेकर पांच वर्ष आयु तक के बच्चों के उपचार की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। राजधानी सहित प्रदेश में तेजी से बढ़ रही एचआईवी एड्स की बीमारी से बचाव के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज में शिशुओं की एचआईवी जांच के लिए ब्लड सैम्पल लिए जा सकेंगे। इसके लिए एड्स कंट्रोल सोसायटी द्वारा जीएमसी के माइक्रोबायलॉजी विभाग को एचआईवी जांच किट दी जाएगी। इस किट के जरिए विभाग की लैब में शिशुओं के ब्लड सैम्पलिंग कर उन्हें जांच के लिए मुम्बई भेजा जा सकेगा। अधिकृत जानकारी के अनुसार यह किट जीएमसी के माइक्रोबायलॉजी विभाग को अगस्त माह के अंत तक उपलब्ध करा दी जाएगी।

बच्चों में जांच करना कठिन

हालांकि हमीदिया के एआरटी सेंटर में संदिग्ध एचआईवी रोगियों की रुटीन जांच की व्यवस्था है। प्रसव से पहले गर्भवती महिलाओं और प्रसव के बाद प्रसूति महिलाओं की भी एचआईवी जांच हो जाती है, लेकिन नवजात शिशुओं यह पता लगाने में कि वह कहीं एचआईवी पॉजीटिव तो नहीं है, अभी तक परेशानियां आ रही थीं, क्योंकि मेडिकल कॉलेज में इस तरह की जांच करने के लिए सैम्पलिंग किट का अभाव था। इस किट के द्वारा एक दिन से लेकर डेढ़ माह तक के बच्चे के रक्त का नमूना लिया जा सकता है। जिसे केमिकल के जरिए पैक कर जांच के लिए लैबोरेटरी तक सुरक्षित भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट में यह पता लग जाएगा कि नवजात शिशु जन्म से एचआईवी पॉजीटिव है या फिर वह उसकी मां की वजह से एचआईवी पॉजीटिव हुआ है।

अब तक सफर करते थे बच्चे

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार अभी तक स्थिति थी कि कोई नवजात शिशु यदि बीमार है और तमाम उपचार के बाद भी वह स्वस्थ नहीं हो रहा है, तो यह समझने में परेशानी आती थी कि कहीं वह एचआईवी पॉजीटिव तो नहीं है, क्योंकि उसकी जांच के लिए ऐसी कोई किट ही नहीं थी।

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