भोपाल। निजी चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत सोनोलॉजिस्ट एवं रेडियोलॉजिस्टों द्वारा पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट में संशोधन के विरोध में सोनोग्राफी की दरों में मनचाही वृद्धि करने से मरीजों पर अनावश्यक भार पड़ रहा है।
अब मरीजों ने सोनोग्राफी कराने के लिए सरकारी अस्पतालों की ओर अपना रुख कर लिया है। शनिवार को जेपी, हमीदिया, रेडक्रास अस्पताल सहित गैस राहत अस्पतालों में सोनोग्राफी के लिए आम दिनों की अपेक्षाकृत काफी भीड़ देखी गई। गौरतलब है कि जो सोनोग्राफी पेट की निजी सोनोग्राफी संस्थानों में महज 500 रुपए में हो जाती थी।
अब वही 700 से 800 रुपए में की जा रही है। इसी तरह प्रसूति महिलाओं की जांच की जो सोनोग्राफी 700 रुपए में हो रही थी उसके 1 हजार से 1500 रुपए वसूले जा रहे हैं।
जेपी में सोनोग्राफी कराने आए मनीष सिंह ने बताया कि उनके पेट दर्द का इलाज चल रहा है। उन्होंने पहले केवल 450 रुपए सोनोग्राफी के दिए थे, लेकिन अब निजी सोनोग्राफी सेंटरों में 800 रुपए मांगे जा रहे हैं। उन्होंने अब सरकारी डॉक्टर से इलाज कराना ही बेहतर समझा। जहां इलाज के साथ ही सभी तरह की जांच भी मामूली दरों पर हो रही हैं। जेपी में सोनोग्राफी की जांच मात्र 140 रुपए में हो जाती है।
इसी तरह कमला नेहरू अस्पताल में संगीता यादव, एमसी मेहरा भी सोनोग्राफी कराने केवल इसलिए पहुंचे कि सरकारी अस्पतालों में सोनोग्राफी की दरें इतनी अधिक नहीं हैं कि मरीज केवल जांच में ही लुट जाए। हमीदिया, कमला नेहरू एवं अन्य सरकारी अस्पतालों में भी सीमित दरें हैं।