वाशिंगटन। अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी पर 20 प्रतिशत मतों की जबर्दस्त बढ़त के साथ तुलसी गैबर्ड ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहली हिन्दू अमेरिकी सदस्य बनने की उम्मीद पूरी तरह बरकरार रखी है। होनोलुलू के स्थानीय दैनिक अखबार सिविल बीट ने सोमवार को नवीनतम चुनावी आंकड़े जारी किए और कहा कि गैबर्ड कांग्रेस में हवाई की खाली सीट के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार बनकर और मुफी हैनमैन को पटखनी देकर इतिहास रचने की ओर हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी का प्राइमरी चुनाव 11 अगस्त को होगा। इसमें जीत दर्ज करने वाला नवंबर में होने वाले कांग्रेस के चुनाव में आसानी से जीत सकता है, क्योंकि हवाई निर्वाचन क्षेत्र डेमोक्रेटिक पार्टी का गढ़ माना जाता है। दिलीप सिंह सौंद 1950 में प्रतिनिधिसभा में पहुंचने वाले पहले भारतीय अमेरिकी थे। वह सिख थे। बॉबी जिन्दल प्रतिनिधि सभा में जाने वाले दूसरे भारतीय अमेरिकी हैं, जिन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया है। गैबर्ड ने कहा हमारी बढ़त का कारण साधारण है : लोग घिसी पिटी राजनीति से तंग आ गए हैं, वे नया नेतृत्व और ऐसा व्यक्ति चाहते हैं जो उनके, मध्यम वर्ग के लिए लड़े। गैबर्ड (31) होनोलुलू की काउंसिल सदस्य हैं और यह उनका पहला कार्यकाल है। गैबर्ड ने पहले हो चुके मतदान में ही हैनमैन के 29 प्रतिशत मतों के मुकाबले 49 मतों से बढ़त बना ली है।
भारत यात्र पर वृंदावन देखने की इच्छा
खुद के हिन्दू होने पर गर्व करने वाली गैबर्ड हालांकि, न तो भारतीय हैं और न ही भारतीय मूल की हैं। उनके पिता माइक गैबर्ड वर्तमान में हवाई से सीनेटर हैं और मां कैरोल पोर्टर गैबर्ड शिक्षक एवं व्यवसायी हैं। हवाई आर्मी नेशनल गार्ड की कंपनी कमांडर गैबर्ड स्वेच्छा से दो बार अपनी तैनाती पश्चिम एशिया में करा चुकी हैं। वह 2002 में हवाई राज्य की सबसे कम उम्र की प्रतिनिधि रही हैं और अमेरिका में इस तरह के पद के लिए निर्वाचित होने वाली सबसे कम उम्र की महिला हैं। अब तक कभी भारत की यात्र पर नहीं जाने वाली गैबर्ड का कहना है कि प्रतिनिधि सभा के निर्वाचित सदस्य के रूप में उनकी पहली यात्र भारत की होगी। गैबर्ड ने कहा कि वैष्णव होने के नाते मैं विशेष तौर पर वृंदावन के धार्मिक स्थलों को देखना चाहती हूं। उनका जन्म 1981 में अमेरिकन समोआ के लेओला में हुआ था। वह हिन्दू मां और कैथोलिक ईसाई पिता की पांच संतानों में से चौथी संतान हैं।