डबरा। प्रदेश शासन की ग्रामीण रोजगार सहायक भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिरती जा रही है। स्थानीय प्रशासन एवं नेतानगरी की मिलीभगत इसे भ्रष्टाचार की चपेट में लेने पर आमादा है। भर्ती प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी का कारण पदों को लेकर ठेका पूरे नहीं होने को माना जा रहा है।
डबरा व भितरवार जनपद में रोजगार सहायक भर्ती प्रक्रि या में डबरा ग्रामीण अंचल से हजारों छात्र-छात्रओं ने आवेदन किए हुए हैं। भर्ती प्रक्रि या में लगातार हो रही देरी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाने का डर छात्र-छात्रओं के साथ-साथ अभिभावकों को भी सता रहा है। नेता नगरी के ठेकेदारों के सक्रिय हो जाने के कारण आवेदकों को आवेदनांे में त्रुटि निकालकर अन्य चहेते आवेदकों को मौका देने की आशंका लग रही है।
प्रतिभावान छात्र -छात्रएं हो सकते है प्रभावित
विवादों में घिरी भर्ती प्रक्रिया में व्यापम को माध्यम नहीं बनाया गया है व प्रतिभावान छात्र को पंचायत का मूल निवासी होना अनिवार्य किया गया है, जिससे तिकड़मी छात्र- छात्रएं कागजातों में छेड़-खानी करने की फिराक में घूम रहे हैं, और उनका साथ नेता नगरी के ठेकेदार दे रहे हैं, ऐसें में भर्ती प्रक्रिया से कई योग्य छात्र बंचित रह सकते हैं ।
नेतानगरी के ठेकेदार सक्रिय
रोजगार सहायक के पदों को लेकर उच्च व निम्न स्तर के नेताओं में आपसी सामंजस्य या राशि का बंटवारा सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। खबर यह है कि इन नियुक्तियों में एक लाख से लेकर डेढ़ लाख रूपये तक बसूलने की फिराक में ठेकेदार घूम रहे हैं। नौकरी के ठेकेदार नकली कम्प्यूटर डिप्लोमा या फर्जी अंक-सूची को सही कराने के लिए मनमानी राशि ले रहे हैं। सभी को ज्ञात है कि इस प्रक्रिया में मैरिट छात्रों को प्राथमिकता दी जायेगी, जिसके लिए वह अपना ध्यान फर्जी कागजातों को सही कराने में लगे हुए हैं ।
कम्प्यूटर डिप्लोमा की मान्यता पर हो सकती है गड़बड़ी
शासन द्वारा भर्ती प्रक्रिया में कम्प्यूटर डिप्लोमा को 50 नम्बर दिये जाने के निर्देश के कारण शहर में छात्रों की भीड़ फर्जी कम्प्यूटर डिप्लोमा जुटाने में लगी हुई है। पूरी भर्ती प्रक्रिया 200 नम्बर की होने से कम्प्यूटर डिप्लोमा भर्ती में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
जवाब देने से बचते रहे सीईओ
ग्राम पंचायतों में रोजगार सहायक की भर्ती में होने वाली धांधलेवाजी की आशंका को लेकर राज एक्सप्रेस संवाददाता द्वारा जनपद पंचायत सीईओ शिवप्रताप सिंह प्रजापति से फोन पर जानकारी लेना चाही, लेकिन कई बार फोन लगने के बावजूद भी सीईओ द्वारा कोई जबाव नहंी दिया गया ।
पहले भी हो चुकी है धांधलेबाजी
शासकीय पदों पर व्यापम की परीक्षा के बगैर हुई भर्ती प्रक्रियाओं में पहले भी धांधलेवाजी सामने आती रही है। ग्राम पंचायतों में रोजगार सहायक भर्ती प्रक्रिया में भी व्यापम की परीक्षा की प्रक्रिया को नहीं रखा गया है साथ ही रोजगार सहायक भर्ती प्रक्रिया सीधे जनपद पंचायत द्वारा कराई जा रही है जिससे अयोग्य आवेदक मोटी रकम देकर नौकरी पा सकता है। गौरतलव है कि संविदा शिक्षक में बीएड एवं डीएड की फर्जी अंक सूचियां लगाई गई थी और कई शिक्षक ऐसी ही अंकसूचियाें पर आज भी पदस्थ हैं, जिनकी जांच चल रही है।