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जब एसपी ने भरा 440 का चालान
On 9/4/2012 7:43:07 PM

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इंदौर। ट्रैफिक पुलिस ने सोमवार को प्रात: 9 बजे से 12 बजे तक तथा शाम 5 बजे से 8 के बीच जीरो टालरेंस झोन बनाकर बेकायदा वाहन चालकों के चालान बनाए। हुकुमचन्द घण्टाघर चौराहे पर एएसपी ट्रैफिक अंजना तिवारी, रीगल चौराहे पर डीएसपी ट्रैफिक प्रदीपसिंह चौहान, लेन्टर्न चौराहे पर टीआई एच.के.कन्हौआ तथा हाई कोर्ट तिराहे पर टीआई डी.आर.एस.चौहान अतिरिक्त पुलिस बल के साथ बेकायदा चलने वालें वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया। इस दौरान 317 वाहन चालकों पर कार्रवाई की गयी। 278 वाहन चालकों से मौके पर ही 1,22,320 रूपये अर्थदण्ड किया गया तथा 39 वाहन चालकों को समझौता शुल्क अदा न करने की दशा में कोर्ट के चालान बनाए गए।

एसपी को आ गई दया और..

अभियान के दौरान ही हुकुमचंद घंटाघर से एमवाय की ओर जाने वाला बाइक सवार चिराग सकारिया ट्रैफिक सिग्नल का उल्लंघन करते हुए जाने लगा तभी वहां मौजूद पुलिस टीम ने उसे रोक लिया। वह अफसरों से कहने लगा कि मेरी मम्मी बीमार है और एमवाय अस्पताल में भर्ती है, मैं जल्दी में था इसलिए गलती हो गई। मेरे पास चालान भरने के लिए पैसे नहीं है। उसी दौरान एसपी डाक्टर आशीष सिंह वहां पहुंचे। उन्होंने युवक की व्यथा सुनी तो तत्काल अपनी जेब से निकाल कर 440 रुपए दिए और कहा कि इसे जाने दीजिए, चालान मैं भर देता हूं।

फौजी का भी बना चालान

रीगल तिराहे से गुजर रहे एक फौजी के वाहन को पुलिस ने रोका। वे बेकायदा वाहन चलाते हुए गुजर रहे थे। उन्होंने पुलिस को अपना परिचय देते हुए रौब झाड़ना शुरु कर दिया। तब पुलिस ने कहा कि आपको चालान तो भरना पड़ेगा। उसके बाद फौजी अफसर भी चालान भरकर वहां से रवाना हुए।

एमवाय के डाक्टर और मेडिकल के छात्र भी

रीगल तिराहे से बेकायदा वाहन चलाते हुए कुछ मेडिकल कालेज के स्टूडेंट और एमवाय अस्पताल के डाक्टरों को भी पुलिस ने रोका। इन लोगों ने भी पहले चालान भरने से इनकार किया लेकिन पुलिस के सामने चालान भरना ही पड़ा। इन्हें हिदायत भी दी गई कि आप इतने समझदार लोग होकर भी ट्रैफिक का पालन नहीं करते हैं तो फिर दूसरों से क्या उम्मीद करें।

पुलिस की गाड़ी का भी बना चालान

हाईकोर्ट तिराहे पर पुलिस वाहन एमपी 03 -1092 को भी अभियान के दौरान रोका गया। ड्राइवर ने कहा कि ये तो पुलिस की गाड़ी है। तब अफसरों का कहना था कि नियम कायदे सबके लिए हैं। इस गाड़ी का भी चालान बनाया गया। इसके साथ ही हाईकोर्ट वकील और नगर निगम के अफसरों ने भी चालान की राशि भरने में आनाकानी की, उन्हें कहा गया कि वाहन जब्त कर मामले कोर्ट में भेज दिए जाएंगे तो ये चालान की राशि अदाकर वाहन लेकर रवाना हुए।

ऐसा भी देखनें मिला

-- हाईकोर्ट तिराहे पर एक दो पहिया वाहन पर चार बच्चों को ले जा रहे एक अधेड़ को पुलिस ने रोका और चालान के 440 रुपए भरने की बात कही। वह भी पुलिस से बहस करने लगा। पुलिस ने जब चालान भरने की बात पर जोर डाला तो उसके साथ एक किशोरी जोर-जोर से रोने लगी।

-- रीगल तिराहे पर एक युवती की गाड़ी रोककर उसकी चाबी ले ली गई तो वह अफसर के पास पहुंची और किसी को मोबाइल लगाकर बोली। आप बात कर लीजिए और मुझे छोड़ दीजिए। अफसर ने युवती की बात नहीं मानी और कहा पहले चालान भर दो बाद में मैं बात कर लूंगा।

-- रीगल तिराहे पर जब एक कार में काली फिल्म वाले को रोका तो वह अफसर को धमकी देने लगा कि आप मुझे जानते नहीं है। अफसर ने कहा कि तुम अपना नाम लिखवा दो और चालान कटवा लो मैं नाम देख लूंगा जिससे पता चल जाएगा कि आप कौन हैं।

-- घंटा घर चौराहे से गुजर रहे एक कार सवार को रोका तो उसने तो यहां तक कर दिया कि मेरी गाड़ी किसने रोकी.? मैं उसका ट्रांसफर करवा दूंगा। काफी हुज्जत के बाद भी उसे चालान भरना पड़ा। इस दौरान वह कई लोगों को फोन लगाता रहा।

-- सोमवार को बेकायदा वाहन चलाने वालों में छात्रओं की संख्या बहुत

}यादा रही, कई छात्रओं ने तो चुपचाप चालान भर दिए जबकि कई छात्रएं अफसरों के सामने गिड़गिड़ाती रही कि पहली बार गलती की है हमें माफ कर दिया जाए। कुछ छात्रओं को माफी भी मिली तो कुछ छात्रओं के वाहन क्रेन से ट्रैफिक थाने पहुंचा दिए गए।

-- हाईकोर्ट तिराहे पर एक बाइक पर जा रहे तीन युवकों को रोका तो वे अपने आपको एक विधायक का खास बताते हुए मोबाइल पर बात करवाने की बात करने लगे। चालान बनाने की बात कही तो वे हुज्जत करने लगे। इन युवकों में से एक युवक काफी देर तक नेताजी का नंबर डायल करता रहा लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। इन्हें भी चालान भरना ही पड़ा।

क्या कहा अफसरों ने..

ट्रैफिक पुलिस के अफसरों का कहना है कि नियम कायदे से चलने की आदत तो अब डालना ही पड़ेगी। इससे वाहन चलाने वालों का जीवन भी सुरक्षित रहता है और सड़कों पर चलने वाले भी सुरक्षित रहते हैं।

एएसपी अंजना तिवारी के मुताबिक शहर में यदि लोग ट्रैफिक नियमों का पालन करना शुरु कर देंगे तो काफी हादसे बंद हो जाएंगे। ट्रैफिक रुल्स से वाहन चलाने से जीवन सुरक्षित रहता है। नियमों का पालन करने से उन वाहन चालकों को भी परेशानी से मुक्ति मिलती है जो ट्रैफिक नियमों के मुताबिक सड़क पर वाहन चलाते हैं।

डीएसपी प्रदीपसिंह चौहान कहते हैं कि सड़क हादसे में कई लोगों की अकाल मौत हो जाती है। कई के हाथ पैर टूट जाते हैं और उन्हें महिनों तक बिस्तर पर ही पड़ा रहना पड़ता है। ट्रैफिक नियमों का पालन करें तो हादसों की संभावना लगभग खत्म हो जाती है। नियम वाहन चालकों की भलाई के लिए ही बनाए गए हैं।

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