भोपाल। साहब, चार साल से चार एकड़ जमीन के खसरे में हुई गलती को सुधरवाने के लिए भटक रहा हूं, बावजूद इसके अब तक यह गलती नहीं सुधारी गई, जबकि इस गलती को चार साल पहले ही ठीक कर देना चाहिए था। ऐसा नहीं है कि मेरे द्वारा कोई फर्जी कार्य कराया जा रहा है। जांच के बाद अधिकारी भी इस बात को मान चुके हैं कि कागजात निर्माण में त्रुटि हुई है। अब साहब आप ही बताएं इस छोटी सी गलती का सुधार कब होगा? यह गुहार मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में ग्राम देवपुर तहसील हुजूर के कृषक सुरेश कुमार ने लगाई।
उन्होंने बताया कि मेरे पिता आशाराम अहिरवार की मौत के बाद यह जमीन मेरी माता फूलबाई बेबा के नाम से खसरा-खतौनी में दर्ज की गई। इस जमीन के खसरे पर मां और मेरे नाम के साथ धर्मेन्द्र, अजरुन और ममता का नाम भी है। पुराना खसरा 48/1/1/1/1 था, जिसे 96/1, 97, 107 के रूप में अंकित किया गया, जो कि गलत है, जबकि 93, 109/1क, 109/1ख, 109/2, 108/1, 108/2/1 अंकित होना चाहिए था। मामले को गंभीरता से लेते हुए जनसुनवाई ले रहे एसडीएम एएस पवार और रितु चौहान ने एसडीएम हुजूर को प्रकरण के निराकरण के निर्देश दिए। कलेक्टर जनसुनवाई में मंगलवार को कुल 115 शिकायती आवेदन प्राप्त हुए। सभी शिकायतों को संबंधित अधिकारियों को भेजते हुए निर्धारित समयसीमा में निराकरण करने के लिए निर्देशित किया गया।
नहीं दे रहे छात्रवृत्ति
वेदिका कॉलेज ऑफ फार्मेसी के छात्र रुद्रप्रकाश सेन ने शिकायती आवेदन में बताया कि कॉलेज प्रशासन द्वारा उसकी छात्रवृत्ति की राशि एक लाख रुपए बैंक खाते में जमा नहीं कराई जा रही है, जबकि यह राशि मई में कॉलेज को मिल चुकी है। इस शिकायत पर श्री पंवार ने आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला प्रमुख को इस प्रकरण की जांच के निर्देश दिए।
आवास एक, राशन कार्ड दो
शिवनगर के मकान नंबर-174 में रहने वाले सुरेश गाबड़े ने अपने आवेदन में बताया कि उनके मकान के पते पर उनका राशन कार्ड और मतदाता परिचय पत्र बना है। वह उस मकान में अकेले ही अपने परिवार के साथ रहते हैं, लेकिन इस आवास के पते पर मुकेश जैन ने मतदाता परिचय-पत्र और राशन कार्ड भी बनवा लिया है।